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Haribhoomi-Inh News: चक्रव्यूह में अभिमन्यु भाजपा नेता कृष्ण पाल सिंह यादव , 'चर्चा' प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ

Haribhoomi-Inh News: हरिभूमि-आईएनएच के खास कार्यक्रम 'चर्चा' में प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शुरुआत में कहा कि नमस्कार आपका स्वागत है हमारे खास कार्यक्रम चर्चा चक्रव्यूह में अभिमन्यु.... आप सभी का स्वागत है हमारे इस कार्यक्रम में चक्रव्यूह में अभिमन्यु में, चक्रव्यूह में अभिमन्यु के तहत आज जो हमारे किरदार हैं उनका नाम है डॉक्टर कृष्ण पाल सिंह यादव।

Haribhoomi-Inh News: चक्रव्यूह में अभिमन्यु  भाजपा नेता कृष्ण पाल सिंह यादव , चर्चा प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ
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Haribhoomi-Inh News: हरिभूमि-आईएनएच के खास कार्यक्रम 'चर्चा' में प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शुरुआत में कहा कि नमस्कार आपका स्वागत है हमारे खास कार्यक्रम चर्चा चक्रव्यूह में अभिमन्यु.... आप सभी का स्वागत है हमारे इस कार्यक्रम में चक्रव्यूह में अभिमन्यु में, चक्रव्यूह में अभिमन्यु के तहत आज जो हमारे किरदार हैं उनका नाम है डॉक्टर कृष्ण पाल सिंह यादव। कृष्ण उनके साथ जुड़ा हुआ है। लेकिन कृष्ण नाम जुड़े होने से यह महारत हासिल कर ले, ऐसा कलयुग में तो संभव नहीं होता दिखता है।

वह युग द्वापर का था। जिसमें प्रतिद्वंदी जो थे, वह आपके लिए चक्रव्यूह रच रहे थे। अभिमन्यु चक्रव्यूह में फसा था। वह शत्रु पक्ष के द्वारा रचा गया था। लेकिन हमारे किरदार में डॉक्टर कृष्ण पाल सिंह यादव, जिस संकट में फंसे हैं। वह चक्रव्यू अपनी पार्टी के जरिए रचा हुआ दिख रहा है। भाजपा के सांसद कृष्ण पाल सिंह यानी के पी यादव के साथ बहुत ही जल्दी किरदारों की चाल बदली तो पल भर में पलट गए। ज्योति राव सिंधिया जैसे सियासत के महारथी मैं उन्हें रणभूमि में व्यस्त कर दिया।

थोड़े ही दिन में भक्तों की बेरुखी हुई अर्जुन अभिमन्यु बनकर हमारे सामने आ गए। अपने को ही चक्रव्यू में फंसे हुए देखते हुए इसी को लेकर आज हमारी चर्चा है। यह खास पेशकश कृष्ण पाल सिंह यादव कांग्रेस परिवार से संबंध रखते। थे उनके पिता ना केवल कांग्रेस में बड़े पदों पर रहे। जिला पंचायत के 4 बार के चुनाव भी जीते। केपी यादव की खुद की पहचान और शुरुआत सिंधिया समर्थक के तौर पर रही। पर साल 2018 आते-आते दोनों जुदा हो गए। केपी यादव कांग्रेस को अपनी इच्छाशक्ति के चलते भारतीय जनता पार्टी के हिस्सा बने।

विधानसभा का चुनाव लड़े मात्र 21 वोट से हारे। लेकिन किस्मत में कुछ और लिखा था। नतीजा यह रहा कि लगभग अपराजित रहा सिंधिया परिवार चुनाव के तहत सिंधिया खानदान को सिर्फ दो ही लोगों ने हार दी। एक इंदिरा गांधी और दूसरे के पी यादव ने अपने आप को इस मायने में साबित किया कि वह ज्योतिराज सिंधिया को उस क्षेत्र से हराने में नाकामयाब रहे। सिंधिया खानदान 14 बार चुनाव निरंतर जीता। केपी यादव भारतीय जनता पार्टी के निजी सांसद माननीय सांसद ग्रह सांसद के तौर पर होने लगी है। भाजपा की सरकार रहते हुए भी जिस प्रकार से प्रशासन के स्तर पर बेरुखी तौर पर बर्ताव किया। उसके चलते वह जिस शख्स ने ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे को चुनाव हराया। वह आज अकेला क्यों दिखाई दे रहा है। आज हम अपने कार्यक्रम में समझने कोशिश करेंगे... कई मेहमान हमारे साथ जुड़े हुए कार्यक्रम का हिस्सा है....

यहां देखें पूरा कार्यक्रम



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