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गर्ल्स हॉस्टल में पीरियड्स के दौरान लड़कियों को बैड पर सोने से रोक

गुजरात के होस्टल में लड़कियो के साथ छुआछूत का मामला सामने आया है। पीरियड्स के दौरान लड़कियों को बैड पर सोने नहीं दिया जाता। डाइनिंग टेबल पर खाना खाने पर भी रोक है।

गर्ल्स हॉस्टल में पीरियड्स के दौरान लड़कियों को बैड पर सोने से रोकगर्ल्स पीरियड्स

गुजरात के भुज में गर्ल्स हॉस्टल में पढ़ने वाली लड़कियों के साथ पीरियड्स के दौरान छुआछूत का मामला सामने आया है। पीरियड्स के दौरान छात्राओं को बेड पर नहीं सोने दिया जाता। माहवारी से जुड़े स्ट्रीप टेस्ट को लेकर हुए बवाल के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम हॉस्टल पहुंची है। टीम ने मामले की पड़ताल की है।

भुज के एक हॉस्टल की छात्राओं ने चौकाने वाला खुलासा किया है। छात्राओं ने कहा कि जब वह यहां दाखिला लेने के लिए आती हैं, तभी उनसे इस प्रकिया को लेकर सहमति ली जाती है। जिसमें माहवारी के दौरान डायनिंग हॉल में खाना न खाने का नियम है। इसके अलावा बेड छोड़कर जमीन पर सोने का नियम शामिल है।

वहीं मामला सामने आने के बाद पहुंची दो सदस्यीय इस टीम की अगुवाई राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डॉ.राजुल देसाई ने की। टीम ने संस्थान के प्रशासनिक विभाग के लोगों के साथ मामले को लेकर एक बैठक की। जिसमें हॉस्टल प्रशासन ने संस्थान में ऐसी किसी प्रेक्टिस के बारे में जानकारी होने से इंकार किया। साथ ही कहा कि मामले में 3 महिला कर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित किया गया है।

टीम ने 44 छात्राओं से की बातचीत

महिला आयोग की टीम ने हॉस्टल की 44 छात्राओं से भी इस बारे में बातचीत की है, जिन्होंने इस परिस्तिथि का सामना किया है। टीम को यह भी बताया गया कि लड़कियों को संस्थान की माहवारी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें केवल उस दिन माहवारी को लेकर हॉस्टल प्रशासन द्बारा की गई जांच के तरीके को लेकर आपत्ति है।

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