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वो चार लोकप्रिय काव्य, जिन्होंने भारतेन्दु हरिशचंद्र को बना दिया हिन्दी साहित्य का प्रथम कवि

आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आधुनिक हिन्दी के पहले रचनाकार थे। भारतेन्दु की वो चार लोकप्रिय काव्य, जिन्होंने हिन्दी साहित्य का प्रथम कवि बना दिया गया।

वो चार लोकप्रिय काव्य, जो भारतेन्दु जी को बनाया हिन्दी साहित्य का प्रथम कविभारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्राचीन और वर्तमान काल की युग संधि पर खड़े हुए भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का काव्य अपना एक विशिष्ट महत्त्व रखता है। गोस्वामी तुलसीदास के उपरांत हिंदी साहित्य में वह एकमात्र कवि हैं,जिन्होंने प्रचलित समस्त शैलियों और विभिन्न काव्य-भाषाओं का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। जिसके बाद से ही वह हिंदी साहित्य का प्रथम यथार्थवादी कवि माने जाने लगे।

भारतेन्दु जी के चार लोकप्रिय काव्य:-

1. भक्ति प्रधान रचनाएं -

भारतेन्दु जी ने अपनी अधिकाँश रचनाओं में राधा-कृष्ण के प्रगाढ़ प्रेम, प्रेम और रासलीला आदि से भरी अत्यंत सुन्दर श्रृंगारिक चित्रण किया गया है। सूर और नंददास भक्त कवियों के तरह ही भारतेन्दु जी की भी यही अभिलाषा थी।

ब्रज के लता मोहि कीजै

गोपी पद पंकज पावन की राज जामें सिर भीजै

2. श्रृंगार विषयक रचनाये -

भारतेन्दु जी की काव्यगत विशेषता यह है कि उन्होंने रीतिकालीन वासनामूलक नग्न श्रृंगार का अश्लील पट सर्वदा के लिए बंद कर दिया और हृदय की छुपी भावनाओं के अंतर्दशाओं का उदघाटन किया। प्रेम के संयोग, वियोग दोनों पक्षों का सफल और सरस चित्रण किया गया है।

3. देश भक्ति और राष्ट्रीयता सम्बन्धी रचनाएं -

भारतेन्दु जी ने कुछ ऐसी कवितायेँ लिखी जो उन्हें राज-भक्त के रूप में पहचानी जाती है। किन्तु अगर काफी गहनता से देखी जाए तो उनकी कविताओं में उत्कृष्ट देश भक्ति और राष्ट्रीयता की झलक मिलती है। वास्तव में वह राष्ट्रीयता के मूल प्रवर्तक हैं क्यूंकि यह प्रथम कवि हैं जिन्होंने भारत के प्राचीन इतिहास को कवि के रूप में निहारा और अतीत की गौरव गाथाओं को विस्मरण नहीं किया। 'प्रबोधिनी' में भारत दुर्दशा का हृदयस्पर्शी वर्णन करते हुए इन्होने कहा भी है -

रोबहू सब मिली के आबहु भारत भाई !

हा ! हा ! भारत दुर्दशा न देखि जाई !!

4. समाज सुधार सम्बन्धी समस्या प्रधान रचनाये -

भारतेन्दु जी एक समाज सुधारक भी थे। विविध सामजिक समस्याओं को अपने दृष्टिकोण से सुलझाने का प्रयास किया। साथ ही सामजिक आन्दोलन भी चलाये गए है। बाल-विवाह से हानि, जन्म-पत्री मिलने की अशास्त्र्ता, बालकों की शिक्षा, भ्रूण हत्या, फूट और बैर, स्वदेश प्रेम, हिन्दुस्तान की वस्तु हिन्दुस्तानियों के व्यवहार में लाना, धार्मिक पाखण्ड, अंधविश्वास आदि विषयों पर भारतेन्दु जी ने बहुत सी कविताओं की रचना की है।

Priyanka Kumari

Priyanka Kumari

Jr. Sub Editor


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