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बुंदेलखंड में 400 'जल सहेलियों' की नायाब पहल, 100 गांवों को जल संकट से उबारा

महिलाओं का एक समूह 'जल सहेली' इन दिनों ने मिसाल कायम कर रहा है। दरअसल बुंदेलखंड हमेशा सूखे और पानी के संकट को लेकर सुर्खियों में रहता है लेकिन जल सहेलिया इसे पानीदार बनाने में जुटी हैं। इस समूह में 400 सदस्य जुड़ी हैं जो उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, ललितपुर, जालौन, झांसी और मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, छतरपुर जिलों के सौ से ज्यादा गांव में जल को संरक्षित करने की नायाब मुहिम चला रही हैं।

बुंदेलखंड में 400

महिलाओं का एक समूह 'जल सहेली' इन दिनों ने मिसाल कायम कर रहा है। दरअसल बुंदेलखंड हमेशा सूखे और पानी के संकट को लेकर सुर्खियों में रहता है लेकिन जल सहेलिया इसे पानीदार बनाने में जुटी हैं। इस समूह में 400 सदस्य जुड़ी हैं जो उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, ललितपुर, जालौन, झांसी और मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, छतरपुर जिलों के सौ से ज्यादा गांव में जल को संरक्षित करने की नायाब मुहिम चला रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेज गर्मी के चलते इन दिनों ये जिले प्रभावित हैं। जल सहेलियां अब तक पच्चीस से ज्यादा तालाबों को संवार चुकी हैं और उनमें दोबारा पानी लाने की कोशिश में सफल हुई हैं। जल सहेलियों ने हमीरपुर, जालौन और ललितपुर की 60 ग्राम पंचायतों की तस्वीर ही बदल कर रख दी है।

महिलाओं ने इन ग्राम पंचायतों में हैंडपंप सुधरवाकर, पानी की टंकी बनवाकर, पाइपलाइन डलवाकर और अन्य उपाय कर पीने के पानी की समस्या हल करवाई है। अब ये जल सहेलियां ललितपुर, हमीरपुर और टीकमगढ़ के 50 तालाबों का जनसहयोग से गहरीकरण कर रही हैं। जल सहेलियों का लक्ष्य है कि अगली बारिश में ये पानी से भर जाएं।

बता दें कि बीते आठ साल पहले यूरोपीय यूनियन (EU) के सहयोग से परमार्थ सेवा संस्थान ने पानी पर महिलाओं की हकदारी परियोजना शुरु की थी। उस समय गांव में पंचायतें बनीं। हरेक पंचायत में 15 से 25 महिलाओं को जगह दी गई। पानी की स्वच्छता, प्राकृतिक जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए दो महिलाओं को जल सहेली बनाया गया था। अब जल सहेलियां की संख्या बढ़ती जा रही है।

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