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पंजाब में हर सातवां व्यक्ति कर रहा ड्रग्स का सेवन: पीजीआई स्टडी

एक निजी चैनल के पत्रकार से बातचीत के दौरान प्रो जे एस ठाकुर ने कहा कि बीते 5 सालों में पंजाब में लगभग 30 लाख से अधिक लोग किसी न किसी नशीले पदार्थों का सेवन करते पाए गए हैं।

पंजाब में हर सातवां व्यक्ति कर रहा ड्रग्स का सेवन: पीजीआई स्टडी
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द पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI- पीजीआई) (Post Graduate Institute of Medical Education and Research) के द्वारा की गई स्टडी में सामने आया है कि पंजाब (Punjab) का हर 7वां व्यक्ति किसी न किसी तरह की ड्रग्स (Drugs) का सेवन कर रहा है, जोकि पंजाब की आबादी का 15.4 फीसदी है। यह स्टडी चंडीगढ़ पीजीआई (Chandigarh PGI) के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग (Community Medicine Department) ने की है।

एक निजी चैनल के पत्रकार से बातचीत के दौरान प्रो जे एस ठाकुर ने कहा कि बीते 5 सालों में पंजाब में लगभग 30 लाख से अधिक लोग किसी न किसी नशीले पदार्थों का सेवन करते पाए गए हैं। पंजाब में 20 लाख से ज्यादा लोग शराब का सेवन करते हैं, जो सबसे ज्यादा है। इसी तरह 1.5 मिलियन से अधिक लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। जबकि लगभग 1.7 लाख लोग ओपिओइड का सेवन करते हैं, इसके बाद कैनबिनोइड्स के साथ-साथ शामक-इनहेलेंट-उत्तेजक भी होते हैं। डॉ ठाकुर ने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि राज्य में एचआईवी के उच्च प्रसार के साथ बड़ी संख्या में इंजेक्शन लगाने वाले ड्रग उपयोगकर्ता हैं, जो कि 19.5 प्रतिशत हैं।

डॉ ठाकुर ने जोर देकर कहा कि एक आत्मनिर्भर रणनीति होनी चाहिए जो कि स्पलाई, मांग और नुकसान कम करने के उपायों की दिशा में काम करेगी। स्पलाई में कमी की रणनीति का अर्थ है अवैध ड्ग्स को टारगेट करना, जिसके प्रयासों में आम तौर पर इन ड्रग्स के वितरण और स्पलाई चेन को बाधित करने के प्रयास शामिल होते हैं। अवैध और अवैध ड्रग्स के लिए जनता की इच्छा को कम करने के उद्देश्य से प्रयासों के माध्यम से मांग में कमी की मध्यस्थता की जा सकती है। नशामुक्ति सेवाएं मांग में कमी के उपायों में योगदान दे रही हैं।

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