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मध्यप्रदेश में राज्यसभा के लिए चुनाव 19 जून को, ज्योतिरादित्य सिंधिया-डा. सुमेर सिंह सोलंकी का सांसद बनना तय

भारत निर्वाचन आयाेग ने राज्यसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी। अब आयोग ने 19 जून को चुनाव कराया जाएगा। इसमें एक भाजपा व कांग्रेस दोनों के जीत के लिए एक-एक सीटे पक्की मानी जा रही है। जबकि तीसरी सीट के लिए कड़ी टक्कर होगी।

मध्यप्रदेश में राज्यसभा के लिए चुनाव 19 जून को, ज्योतिरादित्य सिंधिया-डा. सुमेर सिंह सोलंकी का सांसद बनना तय
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कपिल मिश्रा (फाइल फोटो)

भारत निर्वाचन आयाेग ने राज्यसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी। अब आयोग ने 19 जून को चुनाव कराया जाएगा। इसमें एक भाजपा व कांग्रेस दोनों के जीत के लिए एक-एक सीटे पक्की मानी जा रही है। जबकि तीसरी सीट के लिए कड़ी टक्कर होगी। राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ तय हो गया है कि बदले राजनीतिक हालात में भाजपा के दोनों प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं डा. सुमेर सिंह सोलंकी राज्यसभा पहुंच जाएंगे।

कांग्रेस की ओर से भी दो प्रत्याशियों दिग्विजय सिंह एवं फूल सिंह बरैया ने नामांकन दाखिल किए हैं। इनमें से कौन राज्यसभा जाएगा, इसे लेकर संशय बरकरार है। बता दें भाजपा के प्रभात झा, सत्यनारायण जटिया एवं कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो चुका है। इन रिक्त सीटों के लिए चुनाव कराया जा रहा है।

कांग्रेस के हाथ से छिन गई दूसरी सीट

जब राज्यसभा चुनावों की घोषणा हुई थी तब कांग्रेस को एक सीट का लाभ होता दिख रहा था। उम्मीद थी कि कांग्रेस दो सीटें जीतेंगी जबकि भाजपा एक के नुकसान के साथ सिर्फ एक सीट। इस बीच कांग्रेस के 22 विधायकों ने सिंधिया के साथ पार्टी से बगावत कर पार्टी छोड़ दी। इन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस सरकार गिर गई और भाजपा ने प्रदेश में सरकार बना ली। बगावत के बाद विधानसभा में भाजपा का पलड़ा फिर भारी हो गया। वह अपनी दोनों सीटें बचाती दिखाई पड़ रही है। कांग्रेस को अपनी एक सीट से ही संतोष करना पड़ेगा।

दिग्विजय, बरैया में होना है फैसला

कांग्रेस नेतृत्व को फैसला करना है कि पार्टी के विधायक अपने प्रथम वरीयता का वोट दिग्विजय सिंह को दें या फूल सिंह बरैया को। नामांकन दाखिल करते समय दिग्विजय सिंह को पहला प्रत्याशी बनाया गया था। बदले हालात में पार्टी में इस पर मंथन शुरू हुआ कि उप चुनाव में दिग्विजय को राज्यसभा भेजने से ज्यादा लाभ होगा या फूल सिंह बरैया को।

इसलिए भी क्योंकि बरैया चंबल-ग्वालियर अंचल में दलितों के बड़े नेता हैं। इस अंचल में ही सबसे ज्यादा 16 विधानसभा सीटों के लिए उप चुनाव होना है। पार्टी में इसे लेकर विचार चल रहा है कि बरैया को राज्यसभा भेजने से ज्यादा फायदा होगा या विधानसभा की किसी सीट से उप चुनाव लड़ाने पर। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व इस बारे में अब तक अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है।

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