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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आखिर राज्यों में क्यों हो रहा राज्यपाल और सीएम के बीच अधिकार पर तकरार, देखें पूरी चर्चा

Haribhoomi-Inh Exclusive: राज्यों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकार पर तकरार का मामला अब पुराना हो गया है। दिल्ली, पुडुचेरी और केरल के बाद इन दिनों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। अधिकार पर तकरार चर्चा के जरिए प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इन्हीं मुद्दों को हमारे सामने लाने की कोशिश की है।

Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आखिर राज्यों में क्यों हो रहा राज्यपाल और सीएम के बीच अधिकार पर तकरार, देखें पूरी चर्चा
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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आखिर राज्यों में क्यों हो रहा राज्यपाल और सीएम के बीच अधिकार पर तकरार, देखें पूरी चर्चा

Haribhoomi-Inh Exclusive: राज्यों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकार पर तकरार का मामला अब पुराना हो गया है। दिल्ली, पुडुचेरी और केरल के बाद इन दिनों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच तनातनी देखने को मिल रही है।

अधिकार पर तकरार चर्चा के जरिए प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इन्हीं मुद्दों को हमारे सामने लाने की कोशिश की है। बता दें कि इस चर्चा में उनके साथ छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री ब्रिजमोहन अग्रवाल, वरिष्ठ नेता राजेंद्र तिवारी, शिवसेना के नेता विक्रम सिंह और छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव देवेंद्र वर्मा शामिल हुए।

राज्यपाल के साथ ऐसा व्यवहार कितना जायज

मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच की ये तल्खी काफी पुरानी है। हालांकि ऐसा तब होता रहा है, जब केंद्र और राज्य में दो अलग-अलग पार्टियों की सरकार हो। ऐसे में राज्य सरकारों को लगता है कि राज्यपाल केंद्र के आदेशानुसार राज्य की शासन प्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।

बता दें कि राज्यपाल को केंद्र सरकार का प्रतिनिधि भी कहा जाता है। साथ ही राज्यपाल राज्यों के लिए राष्ट्रपति की भूमिका निभाते हैं। राज्यपाल की शक्तियां कार्यकारी, विधायी, वित्तीय और न्यायिक में विभाजित रहती हैं। उनके पास आपात स्थिति में विधानसभा सत्र बुलाने और स्थगित करने का भी अधिकार होता है। इसके अलावा उनके अधिकारों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने का अधिकार, विधानसभा में पारित विधायक को रद्द करने का अधिकार, समीक्षा के लिए वापस भेजने और राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार, राज्यपाल में आपातकाल के दौरान किसी भी प्रकार का अध्यादेश जारी करने का अधिकार शामिल है।

ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल के खिलाफ ऐसे बयान बिल्कुल जायज नहीं है। चर्चा में शामिल बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकारें बहुमत की वजह से आत्म-मुग्ध हैं। इसलिए ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं।

सेकुलर होना गाली कैसे

इस चर्चा के दौरान प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने एक महत्वपूर्ण सवाल किया। उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने उद्धव सरकार के मंदिर न खोलने के मामले में उन्हें सेकुलर कह दिया। उनकी बातों से ऐसा लगा कि सेकुलर शब्द को वे गाली समझते हैं, जिसे संविधान में एक प्रमुख जगह दी गई है। ऐसे में राज्यपाल की अति-सक्रियता कितनी सही है? बता दें कि प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी के इस सवाल का जवाब काफी महत्वपूर्ण है और आज इसका जवाब देश के हर नागरिक को चाहिए कि सेकुलर होना क्यों गलत है? इसका जवाब जानने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को जरूर देखें।


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