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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आंध्रप्रदेश में न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका लोकतंत्र के लिए कितनी खतरनाक, देखें पूरी चर्चा

'न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका जैसी स्थिति इस देश के लोकतंत्र के लिए कितनी खतरनाक है?' इस सवाल के साथ प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इस चर्चा की शुरूआत की। बता दें कि इस चर्चा में उनके साथ विधि विशेषज्ञ कमलेश जैन, कानूनविद कनक तिवारी, पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह और रिटायर्ड जस्टिस एसआर सिंह शामिल हुए।

Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आंध्रप्रदेश में न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका लोकतंत्र के लिए कितनी खतरनाक, देखें पूरी चर्चा
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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - आंध्रप्रदेश में न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका लोकतंत्र के लिए कितनी खतरनाक, देखें पूरी चर्चा

Haribhoomi-Inh Exclusive: इतिहास में पहली बार किसी राज्य में सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही ये आरोप भी लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के जज एन वी रमन्ना मौजूदा सरकार गिराने की साजिश रच रहे हैं। देश के संविधान की रक्षा के लिए तीन स्तंभों की चर्चा होती रही है। संविधान में इन तीनों स्तंभों की अलग-अलग कार्यप्रणाली बताई गई है। इनमें से दो स्तंभों के बीच टकराव की खबर राजनीति में आम बात हो गई है। लेकिन न्यायपालिका पर सीधे आरोप लगाना लोकतंत्र पर ऊंगली उठाने जैसा मालूम पड़ता है।

'न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका जैसी स्थिति इस देश के लोकतंत्र के लिए कितनी खतरनाक है?' इस सवाल के साथ प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इस चर्चा की शुरूआत की। बता दें कि इस चर्चा में उनके साथ विधि विशेषज्ञ कमलेश जैन, कानूनविद कनक तिवारी, पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह और रिटायर्ड जस्टिस एसआर सिंह शामिल हुए।

कौन हैं जस्टिस एनवी रमन्ना

चंद्रबाबू नायडू के आंध्रप्रदेश सीएम के कार्यकाल के दौरान जस्टिस रमन्ना आंध्रप्रदेश सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल थे। 27 जून 2000 में वो आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट में स्थाई जज के तौर पर नियुक्त किए गए। इसके बाद 2013 में 13 मार्च से 20 मई तक आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट में एक्टिंग सीजे रहे।

बता दें कि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को 8 पन्नों का पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन वी रमन्ना पर आरोप लगाया है कि उन्होंने चंद्रबाबू नायडू के साथ मिलकर मौजूदा सरकार को गिराने की कोशिश की। इस मामले में प्रधान संपादक महोदय के साथ चर्चा में शामिल कानून विद कनक तिवारी ने भी कहा कि देश में पहली बार हुआ है जब किसी मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के जज पर ऐसे आरोप लगाए हों। उन्होंने बताया कि मैंने वो पत्र भी पढ़ा है। उस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ काफी गलत भाषा का प्रयोग किया गया है।

प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी के सवाल महत्वपूर्ण

इस चर्चा के दौरान प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने कई महत्वपूर्ण सवाल किए। इन सवालों का जवाब देश का हर नागरिक जानना चाहता है। बता दें कि देश में शासन व्यवस्था को बेहतर ढंग से चलाने के लिए लोकतंत्र को तीन स्तंभों पर खड़ा किया गया है। विधायका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में न्यायपालिका को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। ऐसे में न्यायपालिका पर न सिर्फ ऊंगली उठाना, बल्कि उनपर राजनीति करने का आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक हो सकता है।

लोकतंत्र की गरिमा इसी में निहित है कि हर स्तंभ अपनी सीमा में रहें और सीमा को पार करने की चेष्टा न करे। ऐसे में अगर हर कोई अपनी सीमा भूलने लगे तो लोकतंत्र पर एक भयानक खतरा मंडराने लगेगा। इन्हीं सारे सवालों के साथ डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इस चर्चा को काफी ज्ञानवर्धक बनाया। इसके दौरान संविधान एवं लोकतंत्र के कई पहलूओं को भी जानने का मौका मिला। प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी के साथ इस चर्चा को गौर से देखें और लोकतंत्र की बारीकियों को समझने की कोशिश करें।


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