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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - प्रवासी मजदूरों की मौत के मामले में मौन क्यों है केंद्र सरकार, सुनें पूरी चर्चा

Haribhoomi-Inh Exclusive: कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की मौत के मामले में हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया है। सुनें डॉ हिमांशु द्विवेदी की चर्चा - 'मौत पर मौन क्यों?'

Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - प्रवासी मजदूरों की मौत के मामले में मौन क्यों है केंद्र सरकार, सुनें पूरी चर्चा
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Haribhoomi-Inh Exclusive: जब प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने पूछा - प्रवासी मजदूरों की मौत के मामले में मौन क्यों है केंद्र सरकार, सुनें पूरी चर्चा

Haribhoomi-Inh Exclusive: कोरोना काल में लॉकडाउन होने की वजह से कई मजदूरों की नौकरियां चली गई थी। ऐसे में दूसरे राज्यों में रहने वाले मजदूरों के पास अपने घर जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसके बाद जानकारी मिली कि अपने घर जाने के क्रम में कई प्रवासी मजदूरों की जान चली गई।

अब संसद में जब इस मुद्दे को उठाया गया और सरकार से ये आंकड़ा मांगा गया कि कोरोना काल में कितने प्रवासी मजदूरों की जान गई, तो सरकार मौन हो गई। सरकार ने सीधे शब्दों में कह दिया कि इसका कोई आंकड़ा हमारे पास मौजूद नहीं है। इस पर हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी ने सरकार से प्रश्न किया है कि आखिर प्रवासी मजदूरों की 'मौत पर मौन क्यों' है सरकार?

बता दें कि इस चर्चा में डॉ हिमांशु द्विवेदी के साथ छत्तीसगढ़ के मंत्री अमरजीत भगत, बीजेपी सांसद संतोष पांडेय, सीपीएम के नेता बादल सरोज और मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री राकेश सिंह चतुर्वेदी शामिल हुए। इस दौरान डॉ हिमांशु द्विवेदी का सीधा सवाल था कि केंद्र सरकार इतने बड़े मुद्दे पर बोलने के लिए तैयार क्यों नहीं है? क्या मजदूरों की मौत का मुद्दा गंभीर मुद्दा नहीं है? आखिर सरकार आंकड़ा क्यों नहीं बताना चाहती? डॉ हिमांशु द्विवेदी ने इस चर्चा के माध्यम से बताया कि प्रवासी मजदूरों की 'मौत पर केंद्र सरकार का मौन' कई सवाल खड़े कर रहा है।

ये था पूरा मामला

कोरोना की वजह से देशभर में तबाही का माहौल उत्पन्न हो गया है। हालांकि अब भारत में रिकवरी दर काफी बेहतर होती दिखाई पड़ रही है। लेकिन कोरोना के शुरूआती दिनों में ऐसा नहीं था। अचानक कोरोना के प्रकोप से लोगों में दहशत का माहौल चरम पर पहुंच गया था। ऐसे में सरकार के द्वारा लॉकडाउन के ऐलान के बाद सभी तरह के काम ठप्प हो गए और इस वजह से कई लोगों की नौकरियां भी उनसे छिन गई थी। इस दौरान सबसे बड़ी मुसीबत प्रवासी मजदूरों पर आ गई थी। अब दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों के पास अपने घर जाने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

अब समस्या ये थी कि अपने घर कैसे जाया जाए? लॉकडाउन की वजह से सारी सुविधाओं पर तो ताला लगा हुआ था। ऐसे में कई मजदूरों ने पैदल ही हजारों किमी की यात्रा करने का फैसला किया। हालांकि कई मजदूरों को बसों की सुविधाएं भी मिल गई। लेकिन फिर प्रवासी मजदूरों की मौत की खबरें आने लगी। पता लगा कि रास्ते में ही कई मजदूरों की जान चली गई। कुछ मजदूर बस पलटने से मारे गए, तो कुछ मजदूरों की हजारों किमी भूखे-प्यासे यात्रा करने की वजह से मौत हो गई। अब सरकार ने इन मौतों का आंकड़ा देने से भी साफ इनकार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि हमारे पास इससे जुड़े कोई आंकड़ें नहीं हैं। ऐसे में इतने मौतों की जवाबदेही कौन लेगा? सरकार से इस सबसे बड़े सवाल पर प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी की इस चर्चा को जरूर देखें।


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