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महंत नरेंद्र गिरी की जगह लेंगे बलबीर गिरी, जानें इनके बारे में

बलबीर गिरि बाघंबरी मठ की गद्दी पर बैठेंगे। बलबीर गिरि का जिक्र नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट (Suicide Note) में कई बार उत्तराधिकारी के तौर पर किया गया था।

महंत नरेंद्र गिरी की जगह लेंगे बलबीर गिरी, जानें इनके बारे में
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bharatiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के बाद बलबीर गिरी (Balbir Giri) को बाघंबरी मठ (Baghambari Math) के उत्तराधिकार रूप में चुन लिया गया है। बलबीर गिरि बाघंबरी मठ की गद्दी पर बैठेंगे। बलबीर गिरि का जिक्र नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट (Suicide Note) में कई बार उत्तराधिकारी के तौर पर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराधिकारी के तौर पर बलबीर गिरि के नाम का ऐलान हो गया है। 5 अक्टूबर को नरेंद्र गिरि का षोडशी संस्कार (cremated) होगा। इसी दिन बलबीर गिरि 5 अक्टूबर 2021 को नरेंद्र गिरि की गद्दी पर बैठेंगे।

हालांकि, बलबीर गिरि को मठ से जुड़े सभी बड़े निर्णयों के लिए 5 सदस्यीय प्रशासनिक निकाय से मंजूरी लेनी होगी। 35 वर्षीय बलबीर गिरि का 5 अक्टूबर को राज्याभिषेक समारोह में औपचारिक रूप से अभिषेक किया जाएगा। गिरि बीते 15 वर्षों से महंत नरेंद्र गिरि के सबसे भरोसेमंद शिष्य हैं। जानकारी के अनुसार, बलबीर गिरि उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं और साल 2005 में संन्यास लेने के लिए उन्होंने अपने परिवार को छोड़ दिया था।

खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक, बलबीर गिरि को हरिद्वार में नरेंद्र गिरि के द्वारा दीक्षा दी गई थी। इस समय बलबीर हरिद्वार में बिल्केश्वर महादेव मंदिर की देख-रेख कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बलबीर और आनंद गिरि करीब-करीब एक ही समय में महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य बन गए और दोनों का साथ भी हो गया। बाद में जब नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि के बीच मतभेद सामने आए तो बलबीर गिरी अपने गुरु नरेंद्र गिरि के प्रति वफादार रहे। महंत नरेंद्र गिरी ने साल 2021 में मई के महीने में आनंद गिरि को अखाड़े और मठ से निकाल दिया था। बलबीर गिरि निरंजनी अखाड़े के डिप्टी महंत भी हैं।

कहा जाता है कि बलबीर गिरि मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं। उन्होंने अपने गुरु के निधन के बाद भी मीडिया से दूरी बनाकर रखी। हालांकि, बलबीर गिरि ने अपने गुरु की कथित मौत के बाद सभी समारोहों में हिस्सा लिया। दिलचस्प बात यह है कि महंत नरेंद्र गिरि ने 7 जनवरी 2010 को अपनी पहली वसीयत बनाई, जिसमें उन्होंने बलबीर गिरी को अपना उत्तराधिकारी नामित किया था। हालांकि, 29 अगस्त, 2011 को अपनी दूसरी वसीयत में उन्होंने बलबीर गिरी का नाम उत्तराधिकारी पद से हटा दिया था और आनंद गिरी को नामित किया था।

इसके बाद साल 2020 में भी वसीयत को बदला गया। इस बार फिर से बलबीर गिरी को उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया। महंत नरेंद्र गिरी ने अपने कथित सुसाइड नोट में भी बलबीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बताया था। संतों ने दिवंगत महंत की अंतिम इच्छा का सम्मान करने का निर्णय लिया है। बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि का शव 20 सितंबर को बाघंबरी मठ के एक कमरे की छत से लटका मिला था।

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