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कश्मीर की आजादी के बाद देश का ये राज्य भी मांगे स्वतंत्रता, वहां जाने के लिए लगता है 'वीजा'

आखिरकार मोदी सरकार ने अपने घोषणा पत्र के वादे को पूरा करते हुए जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए हटाने का फैसला कर दिया, सरकार ने न सिर्फ ये किया बल्कि जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग राज्य बनाया और अब दोनों को ही केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया, इसके साथ ही राज्य को मिलने वाले विशेष अधिकार समाप्त हो गए।

कश्मीर की आजादी के बाद देश का ये राज्य भी मांगे स्वतंत्रता, वहां जाने के लिए लगता है

आखिरकार मोदी सरकार ने अपने घोषणा पत्र के वादे को पूरा करते हुए जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से धारा 370 और 35ए हटाने का फैसला कर दिया। सरकार ने न सिर्फ ये किया बल्कि जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग राज्य बनाया और अब दोनों को ही केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही राज्य को मिलने वाले विशेष अधिकार समाप्त हो गए।

जम्मू कश्मीर पर फैसले के बाद कम ही लोगों को पता होगा कि देश में एक राज्य ऐसा भी है जहां के हालात जम्मू-कश्मीर से भी ज्यादा खतरनाक है। कश्मीर में देश के बाकी राज्यों के लोग भले ही जमीन न खरीद पाएं पर वह बिना रोकटोक जा सकते हैं। पर भारत के ही पूर्वोत्तर में बसे नागालैंड (Nagaland) राज्य में आज भी बिना अनुमति लिए प्रवेश नहीं किया जा सकता।

वहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट (Inner line permit) लगती है इसे सरल भाषा मे आंतरिक वीजा भी कहें तो गलत नही होगा। इसकी चर्चा तब शुरू हुई जब भाजपा के नेता अश्वनी उपाध्याय इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय पहुंच गए। इसी 23 जुलाई को भाजपा के ही 2 सांसदों ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया और इनर लाइन परमिट को समाप्त करने की बात की।

इनर लाइन परमिट देश नागालैंड राज्य को छोड़कर किसी और राज्य में नही लागू है। पहले जम्मू कश्मीर में भी ये था पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसे कश्मीर से हटा दिया। यह नियम बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्युलेन्शस, 1873 (Bengal Eastern Frontier Regulations 1873) के तहत लागू है। इसके अंतर्गत किसी राज्य की संरक्षित या फिर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से पहले अनुमति लेने से जुड़ा है।

ब्रिटिश सरकार ने इसकी शुरुआत की और तभी से ये बरकरार है। इसे लागू करने के पीछे जो प्रमुख बात रही वो वहां की जड़ी बूटियों और प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करने को लेकर थी। ब्रिटिशर्स इसे अपने देश सप्लाई करते थे इसलिए बाकी राज्यों के लोगों को वहां जाने से रोका गया था।

अंग्रेज जब भारत छोड़कर चले गए और यहां संविधान बना तब भी इसे बरकरार रखा गया। सरकार का तर्क था कि नागालैंड के लोगों का रहन सहन, संस्कृति औरों से अलग है अगर बाकी लोग जाएंगे तो उन्हें परेशानी होगी। इसलिए वहां ये बरकरार रखा गया। अब जब आजादी के इतने साल बीत गए तो इसे लेकर भी आवाज उठने लगी। लोगों ने सवाल किया कि जब आर्टिकल 14 के तहत सबको समानता का अधिकार है।

आर्टिकल 19 के तहत स्वतंत्रता का अधिकार है तो फिर लोगों को वहां जाने की मनाही क्यों है? जबकि नागालैंड को भी भारत का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। वहां भी संसद चुनकर भारत की लोकसभा में बैठते हैं। फिलहाल कश्मीर के बाद अब नंबर नागालैंड का है जहां लागू इनर लाइन परमिट के खिलाफ आवाज बुलंद होनी है नतीजा क्या होगा? कौन इसके पक्ष में खड़ा होगा और कौन इसके विरोध में खड़ा होगा फिलहाल ये भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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