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संजय राउत बोले अनाथों की नई दुनिया बना रहे हम, दिल्ली हिंसा को देखकर यमराज भी इस्तीफा दे देते

संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का 50 सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में 100 ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

संजय राउत बोले अनाथों की नई दुनिया बना रहे हम, दिल्ली हिंसा को देखकर यमराज भी इस्तीफा दे देतेसंजय राउत

दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में एक कॉलम लिखा है। संजय राउत ने दिल्ली हिंसा को कलेजा चीरने वाला बताया है। संजय राउत ने कहा है कि दिल्ली हिंसा में मौत का तंडव देखने के बाद तो यमराज भी इस्तीफा दे देते।

दंगों में हिंदू और मुसलमानों के मासूम बच्चे अनाथ हो गए। क्या हम अनाथों की एक नई दुनिया बना रहे हैं? मानवता खो चुकी राजनीति, उस राजनीति से निर्माण होने वाला निघृण धार्मिक उन्माद और उस उन्माद से पैदा किया गया नया राष्ट्रवाद देश के बचे-खुचे इंसानों को मार रहा है।

मुदस्सर खान के बच्चे का फोटो कलेजा चीरने वाला

संजय राउत ने अपने लेख में लिखा कि मुदस्सर खान के बच्चे का जो फोटो प्रकाशित हुआ था वो कलेजा चीरने वाला था। हिंसा में मरने वालों का 50 सिर्फ आंकड़ा है, लेकिन वास्तव में 100 ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यदि लोग अभी भी हिंदू और मुस्लिम मानते हैं तो यह मानवता की मौत है।

आज दुनिया हिंदू-मुसलमान, क्रिश्चन-मुसलमान, हिंदुत्व, धर्मनिरपेक्ष के विवाद के कारण विनाश की दहलीज पर पहुंच गई है। देश में धर्म के नाम पर बचाओ! बचाओ! का आक्रोश किया जाता है। सहायता के लिए न तो भगवान, न अल्लाह और न ही येसु दौड़ते हैं। सरकार नामक माई-बाप भी ऐसे संकटों के समय दरवाजे, खिड़कियां बंद करके बैठ जाते हैं। दंगे, अकाल, बाढ़ में कितने लोग मरते हैं। इसके आंकड़े आते हैं, लेकिन इन दंगों में कितने बच्चे अनाथ और लावारिस हुए हैं इसके आंकड़े आने अभी बाकी हैं।

किताबों की राजनीतिज्ञों की रोजी-रोटी बन गई

आगे लिखा कि एक बच्चा अपने खाक हुए घर से स्कूल की जली हुई किताब लेकर निकाल रहा है। ये पुस्तकें उर्दू में न होकर हिंदी में हैं। उस राख में तो हिंदू-मुसलमान मत ढूंढ़ो, लेकिन ऐसी खोज जारी ही है। यह राख मतलब राजनीतिज्ञों की रोजी-रोटी बन गई है।

खून और आंसुओं का रंग धर्म के मुताबिक नहीं होता

आगे लिखा कि दिल्ली के शाहीनबाग में चल रहा आंदोलन विवाद का मुद्दा बन सकता है। किसी ने वहां भड़काऊ भाषण दिया, किसी ने आग लगाई। ये सब कौन लोग थे, जिन्होंने 50 से ज्यादा लोगों की जान ले ली? ऐसा सवाल कई निरपराध बच्चे और उनकी मां की आंखों से बहने वाले आंसू उठा रहे हैं। ऐसा ही सवाल आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मां, राहुल सोलंकी के पिता और मुदस्सर खान के मासूम बच्चे की आंखों से न रूकने वाले आंसू पूछ रहे हैं। खून का रंग और आंसुओं का रंग धर्म के मुताबिक नहीं होता है।

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