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कोरोना वायरस ने बदला मिजाज, फेंफड़ो के बाद अब कर रहा दिल-दिमाग पर हमला

ज्यों-ज्यों कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं,वायरस अपना मिजाज भी बदलता जा रहा है।गुलेरिया ने इस मामले में अब तक के अध्ययन का हवाला देते हुए कहाकि कोरोना का वायरस मरीजों के सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि उसके मस्तिष्क, हृदय और किडनी पर भी असर डालने लगा है।

कोरोना वायरस ने बदला मिजाज, फेंफड़ो के बाद अब कर रहा दिल-दिमाग पर हमला
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कोरोना (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ज्यों-ज्यों कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं,वायरस अपना मिजाज भी बदलता जा रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया के इस बयान ने वायरस को लेकर लोगो की चिंता बढ़ा दी है। गुलेरिया ने इस मामले में अब तक के अध्ययन का हवाला देते हुए कहाकि कोरोना का वायरस मरीजों के सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि उसके मस्तिष्क, हृदय और किडनी पर भी असर डालने लगा है।

उन्होंने कहाकि पिछले 7 माह से कोरोना ने देश में दस्तक दे रखा है और इस समयावधि में वायरस के लक्षण बदलने लगे हैं। अब यह वायरस ज्यादा खतरनाक होकर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर एक साथ कई अंगों पर हमला करने लगा है। उन्होंने कहा कि कोरोना अब सिस्टेमिक बीमारी बनता जा रहस है। यानि ऐसी बीमारी जो एक साथ शरीर के कई अंगों पर हमला कर प्रभावित करती है। गुलेरिया ने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के फेफड़े लंबे वक्त तक सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक आक्सीजन की जरूरत पड़ती है।

निमोनिया की तरह असर

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस के शरीर में हमले के बाद देखा गया कि यह निमोनिया की तरह असर डालता है। लेकिन बाद में इसके लक्षण बदल गए और खून में थक्के बनने लगे। जिसके चलते रोगी के फेफड़े और हृदय काम करना बंद कर देते हैं और उसकी मौत हो जाती है। लेकिन अब यह भी देखा जा रहा है कि कोरोना का वायरस दिमाग और किडनी को भी प्रभावित करने लगा है। लोगों को न्यूरो संबंधित परेशानियां भी होने लगी हैं।

मॉस्को की यूनिवर्सिटी सारे ट्रायल पूरे करने में सबसे आगे

इधर, रूस के सेचेनोव यूनिवर्सिटी का दावा है कि दुनिया की सबसे पहली कोरोना वैक्सीन तैयार करने वह सबसे आगे निकल रही है। इसका नाम गेम कोविड वीएसी एलवायओ रखा गया है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इंसानों पर वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। सेचनोव यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी ट्रॉपिकल एंड वेक्टर-बॉर्न डिसीज के डायरेक्टर अलेक्जेंडर लुकाशेव का कहना है, हमारा मकसद इंसानों को सुरक्षा देने के लिए कोविड-19 की वैक्सीन को सफलतापूर्वक तैयार करना था। अलेक्जेंडर के मुताबिक सुरक्षा के लिहाज से वैक्सीन की जांच की जा चुकी है। उम्मीद है कि यदि सारी परमिशन मिल जाती है तो यह सितंबर तक बाजार में उपलब्ध होगी।

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