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आरबीआई के दायरे में आयी सहकारी बैंक, ये होगा लाभ

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद देश में बैंकिक नियम (संशोधन) अध्यादेश लागू हो गया है। इस अध्यादेश के जरिए अब सरकारी बैंकों की तरह ही देशभर के सहकारी बैंक भी भारतीय रिजर्व बैंक के दायरे में आ गए हैं।

आरबीआई के दायरे में आयी सहकारी बैंक, ये होगा लाभ
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आरबीआई

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद देश में बैंकिक नियम (संशोधन) अध्यादेश लागू हो गया है। इस अध्यादेश के जरिए अब सरकारी बैंकों की तरह ही देशभर के सहकारी बैंक भी भारतीय रिजर्व बैंक के दायरे में आ गए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने गत 24 जून को वित्त मंत्रालय के एक प्रस्ताव के तहत बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश-2020 को स्वीकृति दी थी। इस अध्यादेश को राष्ट्रपति ने मंजूर करते हुए जारी कर दिया है।

मसलन इस अध्यादेश के जरिए बैंकिंग नियमन अधिनियम-1949 में संशोधन सुनिश्चित हो गया है, जो अब देश देशभर के सभी 1540 सहकारी और 58 बहु-राज्य सहकारी बैंकों पर लागू हो गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार अब सरकारी बैंकों की तरह ही सहकारी बैंक भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारों के दायरे में आ गए हैं। इस अध्यादेश का मकसद बेहतर गवर्नेंस एवं निगरानी सुनिश्चित करके जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना और सहकारी बैंकों को मजबूत करना है, ताकि प्रोफेशनल रुख अपनाकर सुव्यवस्थित बैंकिंग नियमन सुनिश्चित किया जा सके और इसके साथ ही पूंजी तक उनकी पहुंच को भी संभव किया जा सके। इन संशोधनों से राज्य सहकारी कानूनों के तहत सहकारी समितियों के राज्य पंजीयकों के मौजूदा अधिकारों में कोई कमी नहीं आई है। ये संशोधन उन प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) या सहकारी समितियों पर लागू नहीं होते हैं, जिनका प्राथमिक उद्देश्य एवं प्रमुख व्यवसाय कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त मुहैया कराना है, और जो 'बैंक' या 'बैंकर' अथवा 'बैंकिंग' शब्द का उपयोग नहीं करते हैं तथा जो चेकों के अदाकर्ता के रूप में कार्य नहीं करते हैं।

मंत्रालय के अनुसार अध्यादेश के जरिए बैंकिंग नियमन अधिनियम की धारा 45 में भी संशोधन किया गया है, ताकि आम जनता, जमाकर्ताओं एवं बैंकिंग प्रणाली के हितों की रक्षा करने और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए किसी बैंकिंग कंपनी के पुनर्गठन या विलय की योजना बनाई जा सके। यहां तक कि संबंधित बैंकिंग कंपनी के कामकाज पर अस्थायी स्थगन या रोक लगाने का आदेश जारी किए बिना ही उसके पुनर्गठन अथवा विलय की योजना बनाना संभव हो सकेगा, जिससे कि वित्तीय प्रणाली में किसी भी तरह के व्यवधान को पूरी तरह से टाला जा सके।

करोड़ों खाताधारकों को मिलेगा फायदा

देश में सभी बैंकिंग नियम अब सहकारी बैंकों पर भी उसी तरह लागू होगें, जिस प्रकार आरबीआई की शक्तियां अनुसूचित बैंकों पर लागू होती हैं। सरकार का मानना है कि इस बैंकिंग नियम संशोधन से आरबीआई के क्षेत्राधिकारी में निवेशकों को उनके पैसे को सुरक्षित करके भरोसा सुनिश्चित किया जा सकेगा। वहीं सहकारी बैंकों के देशभर में करीब 8.60 करोड़ खाताधारकों की जमा राशि की सुरक्षा भी सुनिश्चत होगी।

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