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युवाओं में बढ़ी नशे की लत, पांच राज्य हुए एकजुट

भारत में नशे की जड़ कितना मजबूत हो गई है इसके बारे में कह पाना बेहद मुश्किल है। हर राज्यों में नशे की समाग्री बड़े ही शातिराना ढंग से लोगों तक पहुंचाई जाती है। पंजाब में अवैध ड्रग्स की तस्कारी पड़ोसी देश पाकिस्तान से हो रही है। कमोबेश यही हाल राजस्थान का भी है। वहां पिछले तीन सालों में अफीम और स्मैक की लत ने तो सैकड़ों लोगो की जान ले चुका है।

युवाओं में बढ़ी नशे की लत, पांच राज्य हुए एकजुट
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देश में तमाम समस्याओं के बीच पिछले एक दशक से नशे की समस्या सबसे तेजी से उभर कर सामने आई है। नशे ने युवाओं को अपने लपेटे में ऐसे लिया कि उन्हें आगे बढ़ने से ही रोक दिया। इस बड़ी समस्या से जूझ रहे 5 राज्यो के मुख्यमंत्रियों ने बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में एक कॉन्फ्रेंस किया और इसके उन्मूलन को लेकर व्यापक चर्चा किया।

इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बैठक में शामिल हुए। उन्होंने अपनी सरकार की तरफ से लोगों को नशे के जंजाल से बचाने के लिए हो रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।


भारत में नशे की जड़ कितना मजबूत हो गई है इसके बारे में कह पाना बेहद मुश्किल है। हर राज्यों में नशे की समाग्री बड़े ही शातिराना ढंग से लोगों तक पहुंचाई जाती है। पंजाब में अवैध ड्रग्स की तस्कारी पड़ोसी देश पाकिस्तान से हो रही है। कमोबेश यही हाल राजस्थान का भी है। वहां पिछले तीन सालों में अफीम और स्मैक की लत ने तो सैकड़ों लोगो की जान ले चुका है।

हिमाचल और उत्तराखंड का भी कुछ ऐसा ही हाल है। दूसरे राज्यों से जाने वाले तमाम सैलानी तो जैसे वहां सिर्फ नशा करने ही जाते हैं। पहाड़ों पर जगह जगह फैली शराब की बोतले इस बात के सुबूत हैं। लोकल युवाओं में नशे की लत ऐसी लग गई है कि उन्हें इससे ज्यादा सुकून कहीं मिलता ही नहीं। सरकार ने वहां रीहैबिलिटेशन सेंटर खोलकर युवाओं को मुख्य धारा में लाने की कोशिश की पर उम्मीदों के मुताबिक अभी कामयाबी नहीं मिल सकी है।


अगर एक नजर आंकड़ो पर डाले तो पिछले कुछ सालों में शराब पीने वाले लोगों में काफी इजाफा हुआ है। चूंकि शराब कानूनी रूप से वैध है इसलिए वह आसानी से मिल जाती है। देश में 21.4 फीसदी लोग शराब के नशे के शिकार हैं। देश में 3 फीसदी ऐसे लोग हैं जो गांजे-भांग का जमकर सेवन करते हैं। 4 फीसदी लोग प्रतिबंधित ड्रग और 0.7 फीसदी लोग अफीम के जरिए नशा करते हैं। 0.1 फीसदी ऐसे भी लोग हैं जो इंजेक्शन के जरिए जानलेवा ड्रग ले रहे हैं।

नशाखोरी के मामलों में सबसे आगे देश का भविष्य कहा जाने वाला युवा वर्ग है। जब हम उनके नशे के पीछे कारण खोजने की कोशिश करते हैं तो पता चलता है कि बेरोजगारी, बदलती जीवन शैली, एकाकी जीवन, आपसी कलह जैसे प्वाइंट सामने निकलकर आते हैं। युवाओं के भरोसे नशे ने भारत में ऐसा करोबार बनाया कि इस समय 3 अरब डॉलर से भी ज्यादा का कारोबार बना चुका है।

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