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खुलासा : एलएसी के कुछ इलाकों में अभी भी तैनात है चीनी सेना, 20 हजार से ज्यादा सैनिक टैंकों के साथ मौजूद

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले दो महीने से जारी विवाद के खत्म होने के शुरूआती संकेत मिलने के बाद अब भारत का पूरा जोर एलएसी के गहराई वाले इलाकों में बड़ी तादाद में हथियारों और अन्य जरूरी सैन्य साजो सामान के साथ तैनात ड्रैगन की सेना की संपूर्ण वापसी पर रहेगा। क्योंकि इसी के बाद दोनों देशों के बीच एलएसी पर पूरी तरह से शांति स्थापित हो सकेगी।

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चीनी सेना (प्रतीकात्मक फोटो)

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले दो महीने से जारी विवाद के खत्म होने के शुरूआती संकेत मिलने के बाद अब भारत का पूरा जोर एलएसी के गहराई वाले इलाकों में बड़ी तादाद में हथियारों और अन्य जरूरी सैन्य साजो सामान के साथ तैनात ड्रैगन की सेना की संपूर्ण वापसी पर रहेगा। क्योंकि इसी के बाद दोनों देशों के बीच एलएसी पर पूरी तरह से शांति स्थापित हो सकेगी।

शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि अगले सप्ताह दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच में चौथे दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत होगी। जिसमें भारत की ओर से शामिल होने जा रहे लेह स्थित सेना की 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह गहराई वाले इलाकों से चीनी सेना की शत-प्रतिशत वापसी के मुद्दे को अपने समकक्ष मेजर जनरल लियु लिन के सामने पुरजोर ढंग से उठाएंगे।

20 किमी़ दूर बैठी चीनी सेना

एलएसी के मौजूदा विवादित बिंदुओं से गहराई वाले इलाकों की दूरी महज 20 किलोमीटर है। यहां पर चीनी सेना बीते 4-5 मई को एलएसी के अलग-अलग गश्ती बिंदुओं पर किए जा रहे अतिक्रमण के तुरंत बाद से आकर डटी हुई है। आंकड़ों के हिसाब से यहां पर चीनी सेना के कुल करीब 20 से 50 हजार जवान अपने हथियारों, टैंक, तोपों, मिसाइलों के साथ तैनात हैं। इन्हें सहयोग देने के लिए चीन के लड़ाकू विमान और जंगी पोत भी दूर समुद्र में डटे हुए हैं।

भारत आंख मूंदकर भरोसा करने के मूड में नहीं

इसे देखते हुए भारत को चीन द्वारा भविष्य में फिर से एलएसी का अतिक्रमण कर बड़ा विवाद खड़ा किए जाने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारत चीन पर आंख मूंदकर भरोसा करने के मूड में कतई नहीं है। हालांकि ड्रैगन की इस आक्रामकता के मद्देनजर सुरक्षात्मक रूप से भारत ने भी समान दूरी पर एलएसी के गहराई वाले इलाकों में भारतीय सेना का जमावड़ा बढ़ाया हुआ है। वायुसेना और नौसेना भी हाईअलर्ट पर हैं।

चीन ने अपनी सेना को दो किमी पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू की

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले महीने 6 जून को दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच हुई पहली बैठक में भी गहराई वाले इलाकों से भी सेनाओं की संपूर्ण वापसी को लेकर भी चीन सहमत था। लेकिन इसके बावजूद उसने अभी केवल सांकेतिक तौर पर विवादित जगहों से ही अपनी सेना को करीब दो किलोमीटर पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

पीपी 14, 15 से पीछे हटी सेनाएं

अभी चीन की सेना एलएसी के सबसे विवादित सैन्य गश्ती बिंदु 14 और 15 (हॉट स्प्रिंग) से निधार्रित दो किलोमीटर की दूरी पर पूरी तरह से पीछे हट चुकी है। इसमें उसने अपने बंकरों को ध्वस्त कर लिया है, टैंट हटा लिए हैं और सैन्य वाहनों के साथ जवानों की वापसी कर ली है। इसी अनुपात में भारत ने भी उक्त जगहों से अपनी सेना वापस बुला ली है।

यह प्रक्रिया बीते दो दिनों से जारी थी जो बुधवार को पूरी हो गई है। इस सप्ताह रविवार तक चीन की सेना के एलएसी के अन्य विवादित गश्ती बिंदुओं जैसे पीपी-17 यानि गोगरा, पेंगांग त्सो झील और देपसांग प्लेंस के इलाके से भी अपने साजो सामान के साथ पीछे हटने की संभावना जताई जा रही है।

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