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प्रमोशन में आरक्षण मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है केंद्र सरकार

सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा पशोपेश में पड़ गई हैं। हालांकि पार्टी हालात की समीक्षा कर रही है। फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है।

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सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हमलावर हुए विपक्ष के रुख को देखकर भाजपा पशोपेश में पड़ गई हैं। हालांकि पार्टी हालात की समीक्षा कर रही है,लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार,सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद पार्टी में दो अलग-अलग राय बन रही है। एक वर्ग का मानना है कि संविधान के मौलिक अधिकारों के साथ ज्यादा छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। लेकिन विपक्ष जब इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर संघ के साथ मिलकर आरक्षण खत्म करने का षड़यंत्र रचने का गंभीर आरोप लगा रहा इस मामले को गर्माने की कोशिश कर रहा है तो सरकार में भी इससे निपटने के तरीको पर विचार शुरू हो गया है।

फिलहाल सामाजिक न्याय मंत्रालय पूरे मामले का अध्ययन कर रहा है। इसलिए अभी इस पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतक्रियिा नहीं आ रही है। लेकिन पार्टी व सरकार से जुड़े ज्यादातर लोगों को मानना है कि इस मामले पर जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार नहीं है।

इसके लिए न्यायालय राज्य सरकारों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं दे सकती है। हालांकि सरकारे चाहे तो इस संबंध में अपना फैसला ले सकती हैं। इसके बाद से एक बार से देश में आरक्षण की राजनीति गरमाने का आसार बढ़ गया है।

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