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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: गुजरात HC ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों की याचिका को किया खारिज

गुजरात हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अधिक मुआवजे का रास्ता अब भी खुला है और किसान जमीन के एवज में और अधिक धन की मांग के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

गुजरात हाईकोर्ट ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों की याचिका को किया खारिजGujarat HC Dismisses Farmers' Challenge Against Land Acquisition For Bullet Train Project

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat HC) ने अपने 361 पन्नों के फैसले में अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना (Ahmedabad-Mumbai Bullet Train Project) के लिए जमीन अधिग्रह की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली किसानों की सौ से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया।

जमीन के एवज में करें और अधिक धन की मांग

हालांकि जस्टिस एएस दवे और जस्टिस बीरेन वैष्णव की बेंच ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए कहा कि अधिक मुआवजे का रास्ता अब भी खुला है और किसान जमीन के एवज में और अधिक धन की मांग के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि अधिक धन की मांग करते हुए किसान पिछले उदाहरणों का जिक्र कर सकते हैं जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या अन्य किसी संस्थान ने जमीन अधिग्रहण के लिए अधिक मुआवजे की पेशकश की थी।

जस्टिस दवे और जस्टिस वैष्णव की बेंच ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की उस वैधता को कायम रखा जिसपर गुजरात सरकार ने 2016 में संशोधित किया था और इसके बाद राष्ट्रपति ने मुहर लगाई थी।

कोर्ट ने किसानों के दावे को किया खारिज

बेंच ने किसानों के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि गुजरात सरकार के पास भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी करने का अधिकार है क्योंकि परियोजना दो राज्यों (गुजरात और महाराष्ट्र) के बीच बंटी हुई है।

बेंच ने कहा कि सामाजिक प्रभाव का आकलन किए बिना भूमि अधिग्रहण शुरू करने की घोषणा के लिए अधिसूचना जारी करना भी वैध है। मुआवजे का हिसाब लगाने की पूरी प्रक्रिया भी उचित है।

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