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Budget 2021: ये हैं मोदी सरकार के 2014 से लेकर 2020 तक के आम बजट, देखें पूरी लिस्ट

Budget 2021: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट एक फरवरी को पेश होगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पांच बार तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश किया था।

Budget 2021: ये हैं मोदी सरकार के 2014 से लेकर 2020 तक के आम बजट, देखें पूरी लिस्ट
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बजट 2021

Budget 2021: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट एक फरवरी को पेश होगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पांच बार तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश किया था। वहीं 2019 में लोकसभा चुनाव होने के कारण फरवरी 2019 में अंतरिम बजट पेश किया गया और फिर जुलाई 2019 में फुल आम बजट आया। 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार के पहली बार केन्द्र की सत्ता में आने के बाद से अब तक बजट में कई बड़े एलान टैक्सपेयर्स के लिए हो चुके हैं। फिर चाहे वह होम लोन के ब्याज पर अतिरिक्त डिडक्शन की राहत हो, रिबेट बढ़ना हो या फिर वै​कल्पिक टैक्स स्लैब की पेशकश। आइए जानते हैं कि मोदी सरकार ने साल 2014 से अब तक आम लोगों के लिए अपने बजट के पिटारे से क्या-क्या निकाला है।

साल 2014 का बजट ( Budget 2014 )

साल 2014 में लोकसभा चुनाव होने के कारण फरवरी में अंतरिम बजट पेश हुआ था। फिर मोदी सरकार सत्ता में आई और तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई में आम बजट पेश किया। 2014 के फुल बजट में बेसिक टैक्स छूट सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़कर 3 लाख रुपये हो गई। वहीं सेक्शन 80(सी) के तहत टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई। सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई।

साल 2015 का बजट ( Budget 2015 )

सेक्शन 80CCD(1b) के तहत NPS में निवेश पर 50 हजार रुपये की टैक्स छूट की घोषणा की गई। सेक्शन 80C और 80CCD(1b) को मिलाकर अब 2 लाख रुपये के टैक्स छूट का लाभ मिलने लगा।

सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री किया गया। इंडिविजुअल्स के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये हो गई। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा 20 हजार रुपये से बढ़कर 30 हजार रुपये हो गई।

सैलरीड क्लास का ट्रांसपोर्ट अलाउंस लिमिट 800 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये प्रति माह कर दिया गया था। 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया। वेल्थ टैक्स खत्म कर दिया गया।

साल 2016 का बजट ( Budget 2016 )

5 लाख से कम आय वालों के लिए टैक्स रिबेट 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया। नए होम बायर्स को 35 लाख रुपये तक के लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई। घर का किराया देने वालों के लिए सेक्शन 80GG के तहत टैक्स छूट को 24,000 से बढ़ाकर 60,000 रुपये किया गया। 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 3 फीसदी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया।

साल 2017 का बजट ( Budget 2017 )

2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की इनकम के लिए इनकम टैक्स रेट को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया। सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये का टैक्स रिबेट दिया गया। 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये की सालाना आय वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज का प्रावधान किया गया।

साल 2018 का बजट ( Budget 2018 )

मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली ने अंतिम बार 2018-19 का बजट पेश किया था। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया। सैलरीड इंडीविजुअल्स के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया। हालांकि इसके बदले में 15000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट को खत्म कर दिया गया।

इक्विटीज से 1 लाख रुपये से अधिक के लांग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 10 फीसदी टैक्स लगाया गया। सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया। सीनियर सिटीजंस की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्‍ट इनकम को टैक्‍स छूट दी गई, पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी। इसके अलावा सीनियर सिटीजन के लिए सेक्‍शन 80डी के तहत 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्‍स छूट क्‍लेम कर सकने की सुविधा दी गई।

साल 2019 का बजट ( Budget 2019 )

टैक्स रिबेट की लिमिट को 2500 रुपये से बढ़ाकर 12500 रुपये किया गया। इसके चलते 5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री हो गई। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40000 रुपये से बढ़ाकर 50000 रुपये किया गया। बैंक या डाकघरों में जमा पर आने वाले 40000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया। पहले यह लिमिट 10000 रुपये थी। किराए पर TDS की सीमा को भी 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये किया गया।

किसी व्यक्ति के दूसरे सेल्फ ऑक्यूपाइड मकान को टैक्स फ्री कर दिया गया। इससे पहले नियम था कि आपके दूसरे मकान में भले ही आपके परिवार के सदस्य रह रहे हों यानी आपने मकान किराए पर न दिया हो, फिर भी उस मकान पर आस-पास के एरिया के मुताबिक रेंट कैलकुलेशन होता था। इसी पर सरकार टैक्स कैलकुलेट करती थी।

सेक्शन 54 के तहत प्रावधान किया गया कि अगर कोई एक मकान को बेचकर मिले पैसों से दो मकान खरीदता है तो दोनों मकानों पर टैक्स से छूट मिलेगी। पहले यह छूट केवल एक नए मकान तक ही सीमित थी। हालांकि शर्त है कि मकान बेचकर हुए कैपिटल गेन्स की रकम 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

साल 2020 का बजट ( Budget 2020 )

बजट 2020 में वैकल्पिक आयकर स्लैब्स की घोषणा की गई। अब करदाताओं को पुराना परंपरागत इनकम टैक्स स्लैब और नया वैकल्पिक टैक्स स्लैब दोनों उपलब्ध हैं। वैकल्पिक टैक्स स्लैब इस तरह है।

कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स की ओर से दिए जाने वाले डिविडेंड पर DDT खत्म कर दिया गया। ओवरसीज रेमिटेंस और ओवरसीज टूर पैकेज की बिक्री पर TCS वसूल करने के लिए आयकर कानून के सेक्शन 206C में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया। सेक्शन 206C के तहत नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 7 लाख रुपये या इससे ज्यादा अमाउंट एक वित्त वर्ष में भारत के बाहर LRS के तहत रेमिटेंस के रूप में भेजता है तो 5 फीसदी की दर से TCS देय होगा।

अगर ऑथराइज्ड डीलर या टूर पैकेज विक्रेता को PAN या आधार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो TCS की दर 10 फीसदी होगी। हालांकि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर इसका रिफंड पाया जा सकेगा। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कर में रियायत। डायरेक्ट टैक्स की मुकदमेबाजी कम करने के लिए विवाद से विश्वास स्कीम की घोषणा।

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