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कृष्णानंद हत्याकांड : 400 राउंड गोलियां चली, विधायक समेत 7 लोगों की हत्या और 14 साल बाद कोई दोषी नहीं

आज से 14 साल पहले उत्तर प्रदेश में हुई सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या में सभी आरोपियों को सीबीआई कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया। आरोपियों में बाहुबली विधायक मुख्यार अंसारी, उनके भाई सांसद अफजल अंसारी शामिल थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक सवाल खड़ा हो गया कि आखिर तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 साथियों की निर्मम हत्या का जिम्मेदार कौन है?

कृष्णानंद हत्याकांड : 400 राउंड गोलिंया चली, विधायक समेत 7 लोगों की हत्या और 14 साल हत्यारोपी कोई नहीं
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BJP MLA Krishnanand Rai Murder case reason behind acquittal of mukhtar ansari and others

आज से 14 साल पहले उत्तर प्रदेश में हुई सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या में सभी आरोपियों को सीबीआई कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया। आरोपियों में बाहुबली विधायक मुख्यार अंसारी, उनके भाई सांसद अफजल अंसारी शामिल थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक सवाल खड़ा हो गया कि आखिर तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय और उनके 6 साथियों की निर्मम हत्या का जिम्मेदार कौन है?

मारे गए विधायक के वकील रामाधार राय ने आरोपियों को सजा न होने में कई कारण बताए। उन्होंने कहा कि मुख्य गवाहों के गवाही देने से मुकरने से केस लगातार कमजोर होता गया। साथ ही हत्याकाण्ड में जिंदा बचे शशिकांत राय और प्रत्यक्षदर्शी मनोज गौड़ की संदिग्ध मौत ने भी केस को कमजोर कर दिया। वकील राय ने कहा कि गाजीपुर संजीव राय और मुन्ना राय गवाही दे देते तो आरोपी बरी न हो पाते।

विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के इस केस में कई और कारण रहे जिसकी वजह से आरोपियों को दोषी साबित नहीं किया जा सका। वकील रामाधार राय की माने तो मुख्तार अंसारी फैजाबाद जेल में बंद बाहुबली अभय सिंह से मोबाइल फोन पर इस हत्याकांड को लेकर बात की थी, इसके साक्ष्य भी अदालत में पेश किए गए। वकील ने इसमें मुख्तार अंसारी की आवाज होने की बात कहते हुए आवाज टेस्ट करने की अर्जी दी गई पर जज ने खारिज कर दी।


मामले में फैसला सुनाने वाले स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने इस हत्याकांड को बेहद भयानक बताया। उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस और सीबीआई ने जांच मामले की जांच की। गाजीपुर में चल रहे केस को कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका के बाद 2013 में दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। उन्हें डर था कि गाजीपुर में गवाह आरोपियों के दबाव में आ जाएंगे। उनका डर सही साबित हुआ दिल्ली में केस ट्रांसफर होते ही मुख्य गवाहों ने गवाही देने से मना कर दिया।

स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने कहा कि अगर गवाहों को ट्रायल के दौरान विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2018 का लाभ मिलता तो वह गवाही देने से न मुकरते। और मामले का नतीजा कुछ और होता। बताते दें कि विधायक की निर्मम हत्या के बाद पुलिस ने अंसारी भाईयों के अलावा संजीव माहेश्वरी जीवा, एजाज, अता उर रहमान, मुन्ना बजरंगी, फिरदौस, रामू मल्लाह, राकेश पांडे, जफर, अफरोज खान, विश्वास नेपाली, मंसूर अंसारी के खिलाफ 6 अलग अलग चार्जशीट दायर की। मुन्ना बजरंगी को पिछले साल बागपत जेल में हत्या कर दी गई थी। फिरदौस की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। विश्वास नेपाली और जफर को पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई।

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