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Birthday Special: मुंबई में बाल ठाकरे की तूती बोलती थी, ऐसा धाकड़ नेता अब नहीं

शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की आज जंयती है। कई दिग्गजों ने आज बालासाहेब को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें नमन किया। आइए जानें बालासाहेब से जुड़ी कुछ खास बाते जो शायद आप न जानते हो।

मुंबई में बाल ठाकरे की तूती बोलती थी, ऐसा धाकड़ नेता अब नहींshiv sena founder bal thackeray

महाराष्ट्र की राजनीति में तहलका मचाने वाले शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की आज जंयती है। कार्यकर्ताओं ने बालासाहेब को श्रद्धांजलि देने के लिए शिवाजी पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बाला साहेब ठाकरे को नमन करते हुए उन्हें अपने शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित की।

बाला साहेब कोई आम नेता नहीं थे। उनकी पूरे मुंबई में तूती बोलती थी। बाला साहेब की बात में वो दम था। जो शायद आज किसी नेता में नजर नहीं आता। वह एक निडर नेता के रूप में जाने जाते थे।

बाल ठाकरे की लार्जर दैन लाइफ इमेज रही है। ऐसा शख्स जिसकी मुंबई में तूती बोलती थी। धाक ऐसी कि कोई समकालीन नेता उनके दूर दूर तक नहीं था। एक राजनैतिक पार्टी का अध्यक्ष जो बड़ी धमक के साथ कहता था कि उसका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है।

बाल ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे में हुआ था। उनके पिता केशव ठाकरे एक पत्रकार थे। बाला साहेब ठाकरे ने भी अपने करियर की शुरुआत बतौर कार्टूनिस्ट की थी। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई नेताओं के कार्टून बनाये और धीरे-धीरे खुद ही राजनीति में आ गये। आइए जानें बाला साहेब ठाकरे की जिंदगी से जुडी कुछ अनुसूनी बातें जो शायद आप न जानते हो।

- 13 अंक को अशुभ माना जाता है लेकिन इसके विपरीत बाल ठाकरे के लिए अंक 13 बहुत खास था। उन्हें ऐसे ही अंक पसंद थे जिन्हें जोडऩे पर 9 आता हो।

- बाल ठाकरे ने 3 बजकर 33 मिनट पर ही अंतिम सांस ली थी जिसका जोड़ 9 आता है। बाल ठाकरे ने अपना साप्ताहिक कार्टून 'मार्मिक' 13 अगस्त 1960 को प्रकाशित हुआ था।

- जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया तब भी बाल ठाकरे ने सीना ठोंक कर कहा था कि हां ये ढांचा हमारे शिवसैनिकों ने गिराया है।

- महाराष्ट्र के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार की शुरुआत मातोश्री से नहीं बल्कि एक चाल से हुई थी।

- बाल ठाकरे परिवार चाल में रहता था , 18 सदस्यों से शिवसेना की शुरूआत हुई थी।

- उस चाल का नाम है मिरांडा चाल है, जो आज भी मुंबई के दादर में है।

- महाराष्ट्र की बात करें तो लोग मुख्यमंत्री के बंगले वर्षा से ज्यादा मातोश्री को जानते हैं।

- शिवसेना के गठन के बाद बाल ठाकरे ने दक्षिण भारतीयों के खिलाफ नारा दिया था बजाओ पुंगी उठाओ लुंगी।

- बाल ठाकरे पढ़ने में एक औसत (average) छात्र थे लेकिन बहुत क्रिएटिव थे। बहुत अच्छे कार्टून बनाया करते थे। देश दुनिया में क्या चल रहा है इस पर उनकी पकड़ रहती थी, घोर एंटी कम्युनिस्ट थे।

- बाला साहेब की जब फ्री प्रेस जर्नल में नौकरी लगी फिर फिर उन्होंने अपनी मैग्जीन मार्मिक शुरू की। यहीं से उनकी जिंदगी में भी बड़े बदलाव आने शुरु हुए।

-19 जून 1966 में सुबह साढ़े नौ बजे एक नारियल फोड़कर सिर्फ 18 लोगों की मौजूदगी में शिवसेना बनी। प्रबोधन ठाकरे ने पार्टी को शिवसेना नाम दिया। पार्टी के गठन के 4 महीने बाद ठाकरे ने मार्मिक के जरिए शिवसेना की पहली रैली दशहरे पर शिवाजी पार्क में करने का ऐलान किया।

- ज्यादातर सरकारी नौकरियों पर उस समय मुंबई में दक्षिण भारतीयों का कब्जा था। मराठी निचले दर्जे के कामों में ज्यादा थे। जबकि टाई लगाकर ऑफिस जाने वाले साउथ इंडियन थे। बाला साहेब को ये बात बहुत चुभती थी। इसके लिए ही उन्होंने नारा दिया था बजाओ पुंगी उठाओ लुंगी।

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