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Birthday Special: 40 साल तक पंजाब पर शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह की पाकिस्तान में बनाई गई मूर्ति

Birthday Special: 19 वीं शताब्दी की शुरुआत में 40 साल तक पंजाब पर राज करने वाले महाराजा रणजीत सिंह को लोग पाकिस्तान में आज भी याद करते हैं।

Birthday Special: 40 साल तक पंजाब पर शासन वाले महाराजा रणजीत सिंह की पाकिस्तान में बनाई गई मूर्तिमहाराजा रणजीत सिंह

Birthday Special : शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध महाराजा रणजीत सिंह की आज 239वीं जयंती है। सिख समुदाय के लोगों ने महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य के राजा थे। उनका जन्म 13 नवंबर 1780 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) संधावालिया महाराजा महां सिंह के घर हुआ था। जब महाराजा रणजीत सिंह 12 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। महाराजा रणजीत सिंह को आज भी पाकिस्तान के लोग याद कर रहे हैं।

पाकिस्तान में बनाई गई प्रतिमा

19 वीं शताब्दी की शुरुआत में 40 साल तक पंजाब पर राज करने वाले महाराजा रणजीत सिंह को लोग पाकिस्तान में आज भी याद करते हैं। लाहौर फोर्ट में माई जिंदियां हवेली के बाहर महाराजा रणजीत सिंह की नौ फुट की प्रतिमा कांसे की बनी हुई है।

महाराजा अपने पसंदीदा घोड़े कहर बाहर पर हाथ में तलवार लिए बैठे हैं। इस प्रतिमा को बनाने में आठ महीने का समय लगा था। यह स्थान गुरु अर्जुन देव के गुरुद्वारा डेरा साहिब की इमारत के पास है।

पंजाब के महाराजा का ताज

शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध रणजीत सिंह को 12 अप्रैल 1801 में पंजाब का महाराजा का ताज मिला था। बताया जाता है कि जिस दिन रणजीत सिंह को महाराजा घोषित किया गया, वह दिन बैसाखी का था। 'साहिब सिंह बेदी ने रणजीत सिंह के केसरिया तिलक करके उन्हें पंजाब का महाराजा घोषित किया गया।

उस समय रणजीत सिंह की उम्र महज 20 साल की थी। उन्हें किले से एक शाही सलामी दी गई। दोपहर बाद महाराज रणजीत सिंह हाथी पर सवार हुआ और शहर में निकल पड़ा। शहर की गलियों में प्रजा की भीड़ खड़ी थी जिस पर वह सोने और चांदी के सिक्के बरसाते जा रहे थे। शाम में शहर के सभी घरों को प्रकाशमय किया गया।

पंजाब के बाहर साम्राज्य विस्तार

महाराजा रणजीत सिंह ने लाहौर पर विजय प्राप्त करने के बाद अपने सिख साम्राज्य को विस्तार देना शुरू किया। सिख साम्राज्य विस्तार के लिए उन्होंने पंजाब के बाकी हिस्सों के अलावा कश्मीर, हिमालय और पोठोहार क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया। महाराजा रणजीत सिंह ने वर्ष 1802 में अमृतसर को अपने साम्राज्य में मिला लिया था।

वर्ष 1807 में महाराजा रणजीत सिंह ने अफगानी शासक कुतबुद्दीन को हराकर कसूर पर अपना कब्जा जमा लिया। वहीं वर्ष 1818 में मुल्तान और 1819 में कश्मीर सिख साम्राज्य का हिस्सा बन चुका था। 1813-1837 के बीच अफगानों और सिखों के बीच कई युद्ध हुए।

1837 में जमरुद का युद्ध उनके बीच आखिरी भिड़ंत थी। इस भिड़ंत में रणजीत सिंह के एक बेहतरीन सिपाहसालार हरि सिंह नलवा मारे गए थे। इस युद्ध में कुछ सामरिक कारणों से अफगानों को बढ़त हासिल हुई और उन्होंने काबुल पर वापस कब्जा कर लिया।

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