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Pandit Deendayal Upadhyay Jayanti: कांग्रेस की जड़ें हिलाने वाला नेता जिसने रखी थी जनसंघ की नींव, दीन दयाल उपाध्याय से जुड़े 10 रोचक तथ्य

जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyay Jayanti) की 25 सितंबर (25 September) को 105 वीं जयंती मनाई जाएगी। आरएसएस (RSS) विचारक दीनदयाल उपाध्याय ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर जनसंघ की नींव रखी। जिसके बाद पहली बार कांग्रेस के सामने कोई राजनीतिक दल खड़ा हुआ।

Pandit Deendayal Upadhyay Jayanti: जानें भाजपा की नींव रखने वाले दीन दयान उपाध्याय से जुड़े 10 रोचक तथ्य
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Birth Special pandit deendayal upadhyay Jayanti 10 important facts

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रचारक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पहली बार कांग्रेस के सामने कोई विकल्प खड़ा किया। 1951 में जनसंघ की स्थापना कर पहले ही चुनाव में दो लोकसभा की सीटें जीतकर कांग्रेस की जड़े हिलाने का कार्य किया। जनसंघ की स्थापना के दशक दर दशक बाद कांग्रेस कमजोर होती चली गई। जनसंघ से मिलकर बनी जनता पार्टी ने आपातकाल के बाद 1977 से लेकर 1980 तक सरकार चलायी। इसके बाद जनसंघ से निकली भाजपा पिछले 6 साल से कांग्रेस को हटाकर सरकार चला रही है।

जनसंघ के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1914 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। छात्र अवस्था में आरएसएस के संपर्क में आए और प्रचारक बन गए। जिसके बाद जनसंघ की श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर स्थापना की। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारक के तौर पर माना जाता है।


जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Pandit Deendayal Upadhyay Jayanti) की 25 सितंबर (25 September) को 105 वीं जयंती मनाई जाएगी। आरएसएस (RSS) विचारक के जन्मदिन से लेकर महात्मा गांधी जी की 2 अक्टूबर तक भाजपा की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। दीनदयाल उपाध्याय की 105वीं जयंती से लेकर महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक पार्टी इस दिन को भव्य बनाने की तैयार कर रही है।

दीन दयाल उपाध्यक्ष के जीवन से जुड़े 10 रोचक तथ्य...

1. पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, दार्शनिक और राजनीतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक रहे हैं। वो एक समावेशी विचारधारा के समर्थक थे। जो एक मजबूत भारत का निर्माण करना चाहते थे। उनका राजनीति के अलावा साहित्य की तरफ भी काफी झुकाव था।

2. पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बारे में कहा जाता है कि वो अचानक गायब हो गए थे। 11 फरवरी 1968 को उनका शव मुगल सराय रेलवे स्टेशन पर मिला था। जो अब दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन के नाम से जाना जाता है। इसका नाम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बदला था। इसके साथ ही इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखा गया है।

3. पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। यह संस्कार उन्हें घर से ही मिले थे। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था जो जलेसर रोड स्टेशन में सहायक स्टेशन मास्टर थे। परिवार से ही उन्हें शिक्षा का गुण मिला।

4. पंडित दीनदयाल उपाध्याय और उनके भाई शिव दयाल को माता पिता ने ननिहाल भेज दिया था। मामा का परिवार बहुत बड़ा था।

5. दीनदयाल उपाध्याय के माता पिता का देहांत छोटी उम्र में ही हो गया था। जब वो तीन साल के हुए तो पिता का देहांत हो गया और उसके तीन साल बाद यानी जब वो 6 वर्ष के हुए तो माता का इंतकाल हो गया।

6. दीनदयाल उपाध्याय की पढ़ाई एक जगह नहीं हुए बल्कि आगरा, पिलानी और इलाहाबाद (प्रयागराज) से हुई है। जब वो स्टूडेंट थे तभी वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और उनकी विचारधाराओं पर चलते रहे।



7. कहते हैं कि जब उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कि तो वो तुरंत आरएसएस प्रचारक बन गए और संघ के संगठन के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करने लगे। उनके व्यवहार की वजह से सरल और सज्जन व्यक्ति भी क जाता था।

8. 11 फरवरी 1949 की रात को रेल यात्रा के दौरान वे मुगलसराय (दीन दयाल उपाध्याय) रेलवे स्टेशन के आस पास संदिग्ध अवस्था में मृत मिले थे। उनकी मौत को लेकर की रहस्य है।

9. दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मिलकर जनसंघ की नींव रखी थी। यह कहा जा सकता है कि जनसंघ पर खड़ी है भारतीय जनता पार्टी की नींव। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ में रहते हुए उन्होंने एक ऐसी विचारधारा की नींव रखी जिस पर आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी का निर्माण हुआ। भारतीय जनसंघ से ही 1980 में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ है।

10. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार अपने भाषणों में दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम का जिक्र किया है। पीएम मोदी और सीएम योगी की वजह से ही मुगलसराय जंक्‍शन को पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जंक्‍शन बनाया गया है। 2017 में उनके सम्‍मान में मुगलसराय स्‍टेशन का नाम बदलने की घोषणा की गई थी।

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