Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Bharat Parv 2020: जानें आखिर गणतंत्र दिवस के दौरान कहां मनाया जाता है भारत पर्व, महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है थीम

Bharat Parv 2020: 26 जनवरी को देश में 71वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के लाल किले में भारत पर्व का आयोजन किया जा रहा है।

Bharat Parv 2020: जानें आखिर गणतंत्र दिवस के दौरान कहां मनाया जाता है भारत पर्व, महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है थीम
X
भारत पर्व लाल किला (फाइल फोटो)

Bharat Parv 2020: 26 जनवरी को देश में 71वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के लाल किले में भारत पर्व का आयोजन किया जा रहा है। ये आयोजन 26 जनवरी से लेकर 31 जनवरी तक चलेगा।

इसका उद्देश्य भारतीय लोगों को देश के विभिन्न पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारी स्टॉल लगाकर दी जाती है। ताकि वो प्रेरित हों और टूरिस्ट वाली जगहों पर घूमें। इस बार देखो अपना देश और महात्मा गांधी की 150वीं जंयती पर भारत पर्व आधारित है।


गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ से चलने वाली परेड लाल किले पहुंचती है। इस बार कौसानी छाया रहेगा। इस स्टॉल में पर्यटन विभाग के कुमाऊंनी व्यंजन, होटल, पर्यटन स्थलों के बारे में बताया जाता है।


जानकारी के लिए बता दें कि पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार इसका आयोजन कर रही है। जिसमें उत्तराखंड राज्य की ओर से उत्तराखंड पर्यटन के कई विभाग इसमें शामिल होंगे। गढ़वाल, कुमाऊं मंडल विकास निगम, संस्कृति विभाग, उद्योग विभाग आदिश शामिल होंगे। ऐसे में उत्तराखंड के टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हर राज्य को चुना जाता है।

गणतंत्र दिवस का इतिहास

भारत का संविधान 26 जनवरी को लागू होने के बाद हर साल इस दिन को याद करने के लिए राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड को निकाला जाता है। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, जो कई देशों से लेकर बना है। लेकिन 26 नवंबर को संविधान पास हुआ था।

संविधान का इतिहास

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान कहा जाता है, जिसमें सबसे ज्यादा दस्तावेज हैं। सबसे बड़ा होने के अलावा, यह भारतीय राज्य को नियंत्रित करने के बारे में भी बताता है कि कौन किस तरह से काम करेगा। स्वतंत्रता से पहले, भारत में दो सरकारें थीं एक ब्रिटिश सरकार और दूसरी रियासतें। यह संविधान है, जिसने औपचारिक रूप से इन दो भेदों को समाप्त किया और भारत को एक संघ देश बनाया।

मूल रूप से इसका मतलब है कि संसद और राज्य विधानसभाओं के सभी कानून संविधान से अपने अधिकार प्राप्त करते हैं। यहां तक ​​कि भारतीय राज्य के तीन स्तंभ- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका- संविधान से अधिकार प्राप्त करते हैं। संविधान के बिना, हमारे पास भारत को चलाने वाली प्रशासनिक मशीनरी नहीं होगी। यहां तक ​​कि लोगों के मौलिक अधिकार और कर्तव्य भी संविधान के बिना मौजूद नहीं होंगे।

Next Story