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Bharat Bandh: जानें मोदी सरकार से इन 10 यूनियनों की क्या है मांगें, जिसको लेकर है पूरा भारत बंद

Bharat Bandh: देश की 10 बड़ी ट्रेड यूनियन मोदी सरकार के खिलाफ आज सड़कों पर उतर आई है। इसको लेकर इन यूनियनों ने भारत बंद का ऐलान किया था। इस ट्रेड यूनियन में देश की कई बड़े नेता भी अपना समर्थन दे रहे हैं।

Bharat Bandh: जानें मोदी सरकार से इन 10 यूनियनों की क्या है मांगें, जिसको लेकर है पूरा भारत बंदभारत बंद

Bharat Bandh: देश की 10 बड़ी ट्रेड यूनियन मोदी सरकार के खिलाफ आज सड़कों पर उतर आई है। इसको लेकर इन यूनियनों ने भारत बंद का ऐलान किया था। इस ट्रेड यूनियन में देश की कई बड़े नेता भी अपना समर्थन दे रहे हैं।

ये बैंक हैं बंद (Bank Closed)

भारत बंद की वजह से बैंकिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाएं बंद रहेंगी। 6 बैंक यूनियनें हड़ताल पर हैं। जिससे एटीएम और शाखा सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, एसबीआई और सिंडिकेट बैंक की सेवाएं जारी रहेंगी। कई बैंकों ने पहले ही स्टॉक एक्सचेंजों को हड़ताल और बैंकिंग सेवाओं पर इसके प्रभाव के बारे में जानकारी दे दी है।

राहुल गांधी ने बंद का किया समर्थन (Rahul Gandhi supported bharat bandh)

सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स और बैंक यूनियन केंद्र सरकार के खिलाफ अपने मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत बंद का समर्थन किया है।

इन ट्रेड यूनियनों ने किया बंद का ऐलान (trade unions announced a shutdown)

इस भारत बंद में ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, सेल्फ-एंप्लॉयड वुमन एसोसिएशन, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन, यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेसऔर ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर जैसी बड़ी बड़ी यूनियनें शामिल हैं।

वहीं दूसरी तरफ विभिन्न औद्योगिक ट्रेड यूनियनों में महिलाओं और किसानों के समूह भी इस हड़ताल में शामिल हुए हैं। वहीं वाम दलों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बंद का समर्थन मिला है।

ये हैं ट्रेड यूनियनों की सरकार से मांग

1. यूनियनों ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांग रखी हैं। जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सार्वभौमिकरण और रोजगार सृजन के लिए ठोस उपायों के माध्यम से बेरोजगारी शामिल हैं।

2. खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर 2019 में तीन साल के उच्च स्तर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई है, जो खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण थी। इसको कम किया जाएग।

3. श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि प्रमुख मांगों में से एक है। यूनियनों ने मासिक न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये में श्रमिकों के लिए निर्धारित करने के लिए कहा है। अब सरकार से इसे बढ़ाकर 21,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।

4. यूनियनों ने सभी योजना श्रमिकों, जैसे कि मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने में काम करने वालों को श्रमिक का दर्जा देने की मांग की है।

5. यूनियनों ने 1,000 रुपये से 6,000 रुपये की न्यूनतम मासिक पेंशन मांगी है।

6. यूनियनों की अन्य मांगों में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की विलय के मुद्दे को उठाया है।

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