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बैटल ऑफ सारागढ़ी : जब 21 बहादुर सिख सैनिकों ने कर दिए दस हजार अफगानों के दांत खट्टे, लिखी वीरता की दास्तां

आज सारागढ़ी लड़ाई के 122 वर्ष पूरे होने पर भारत याद कर रहा है उन महान 21 सिख योद्धाओं को जिन्होंने सारागढ़ी में दस हजार अफगानों की सेना का बल तोड़ दिया और मरणोंपरांत इन्हे बहादुरी का सर्वोच्च सम्मान दिया गया।

बैटल आफ सारागढ़ी: जब 21 बहादुर सिखो ने कर दिए दस हजार अफगानों के दांत खट्टे
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भारतीय इतिहास अनेकों लड़ाईयों से भरा पड़ा है लेकिन शायद ही कोई ऐसी लड़ाई हुई हो जहां महज 21 योद्धाओं ने दुश्मन की दस हजार की फौज के दांत खट्टे कर दिए हों। इस लड़ाई को इतिहास में बैटल ऑफ सारागढ़ी के नाम से जाना जाता है। लड़ाई के 122 बरस पूरे होने के बाद भी आज जब इस इसकी चर्चा होती है तो देश का सीना गर्व से फूल जाता है।

कब और कैसे हुई ये ऐतिहासिक लड़ाई

12 सितम्बर 1897 को सारागढ़ी नामक स्थान पर यह युद्ध लड़ा गया था। आजकल यह स्थान पाकिस्तान में है। उस दिन का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है। दस हजार अफगान पश्तूनों ने तत्कालीन भारतीय आर्मी पोस्ट सारागढ़ी पर आक्रमण कर दिया।

सारागढ़ी किले में आर्मी पोस्ट पर ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 36वीं सिख बटालियन में महज 21 सिख सैनिक तैनात थे। अफगानों को लगा कि इस छोटी सी पोस्ट को जीतना काफी आसान होगा, पर ऐसा सोचना उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।




गोलियां खत्म हुई तो तलवारों से हुआ सामना

उन्हें ये मालूम नहीं था कि ये जाबाज सिख किस मिट्टी के बने हुए हैं उन 21 बहादुर सिखों ने जान बचाकर भागने के बजाय अपनी आखिरी सांस तक लड़ने का फैसला किया। जब गोलियां खत्म हो गयी तो तलवारों से मुकाबला हुआ ऐसा घमासान युद्ध हुआ कि उसकी मिसालें आज भी दी जाती हैं।

इतिहासकार भी मानते हैं कि ये इतिहास का ऐसा महानतम युद्ध है, जब योद्धा आमने-सामने की लड़ाई में आखिरी साँस तक अद्भुत वीरता से लड़े मानव इतिहास में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता, जब ऐसा भयंकर मुकाबला हुआ हो वो भी जब महज 21 योद्धाओं ने इतनी बड़ी फौज का सामना किया हो।



मरणोंपरांत दिया गया था बहादुरी का सर्वोच्च पुरस्कार

अंत में सभी 21 सिख सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन तब तक वो 600 से अधिक अफगानों को मौत के घाट उतार चुके थे। अफगान इस युदुध को जीत तो गए लेकिन उनका भारी नुकसान हुआ और उनकी सेना का बल टूट गया। इस युद्ध के दो दिन बाद ही ब्रिटिश आर्मी ने फिर से आक्रमण करके पुनः सारागढ़ी पोस्ट को फिर से कब्जे में ले लिया।

उन महान भारतीय सैनिकों को मरणोपरांत ब्रिटिश सरकार की तरफ से बहादुरी का सर्वोच्च पुरस्कार इंडियन आर्डर आफ मेरिट प्रदान किया गया। यह पुरस्कार आज के परमवीर चक्र के बराबर है।




12 सितंबर को ब्रिटेन में मनाया जाता है सारागढ़ी डे

12 सितंबर को सारागढ़ी डे घोषित किया गया और यह आज भी हर वर्ष ब्रिटेन में यह दिन मनाया जाता है। भारत में सिख रेजीमेंट इसे रेजीमेंटल बैटल आनर डे के रूप में मनाती है। अफसोस इस बात का है कि हमारे इतिहास में सारागढ़ी युद्ध की अद्भुत वीरगाथा को कोई स्थान नहीं दिया गया।

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