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Balakot Air Strike: जानें बालाकोट में हमले के लिए क्यों चुना गया था मिराज 2000

Balakot Air Strike: पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना ने 12 मिराज 2000 फाइटर जेट के जरिए बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया। जिसके जरिए जैश-ए-मोहम्मद के 300 आतंकियों को मार गिराया था।

Balakot Air Strike: जानें बालाकोट में हमले के लिए क्यों चुना गया था मिराज 2000मिराज 2000

Balakot Air Strike : जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत हो गई थी। पुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी 2019 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक करके आतंकियों के सक्रिय ठीकानों को नष्ट कर दिया था। जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के लगभग 300 आतंकी भी मारे गए थे।

भारतीय सेना ने इस अभियान में 12 मिराज 2000 फाइटर जेट के जरिए बालाकोट में एयर स्ट्राइक करके आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया था। आइए जानते हैं कि इस अभियान के लिए मिराज 2000 को चुनने के पीछे क्या वजह थी।

1. मिराज 2000 में डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक की क्षमता है। जिसका मतलब है कि यह लड़ाकू विमान दुश्मन के ठिकानों को उनकी सीमा में घुसकर तबाह कर सकता है।

2. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह दुश्मन के रडार में आए बिना ही उनके देश के अंदर तक घुस सकता है।

3. इसका निर्माण फ्रांस की राफेल बनाने वाली कंपनी नें किया है। जिसका नाम है डसाल्ट एविएशन।

4. इस लड़ाकू विमान में नौ हार्ड पॉइंट हैं जिनमें घातक हथियारों को ले जाया जा सकता है। इसमें एमआईसीए मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बैट मिसाइलें शामिल हैं।

मिराज 2000 का इतिहास

मिराज 2000 चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है। 1970 में मिराज 2000 नें अपनी पहली उड़ान भरी थी। इस विमान का उपयोग इस समय 9 देशों में किया जा रहा है। साल 2009 तक मिराज 2000 की कुल संख्या 600 थी।

इंडिया ने डसाल्ट एविएशन कंपनी को 36 सिंगल सीट मिराज 2000 एचएस और 4 ट्विन सीट मिराज 2000 टीएचएस का ऑर्डर अक्टूबर 1982 में दिया था। 29 जून 1985 को भारतीय वायु सेना को नंबर 7 स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी दी गई। जिसके बाद भारतीय वायु सेना पहली विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज 2000 विमान थे। मिराज 2000 को 1986 में वायुसेना में शामिल किया गया।

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