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गोपाल सिंह विशारद को मिला रामलला की पूजा का अधिकार, 1986 में हो चुका है निधन

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में रामलला की पूजा का अधिकारी हिंदू महासभा के गोपाल सिंह विशारद को दिया है। जबकि उनका पहले ही देहांत हो चुका है। ऐसी स्थिति में पूजा का अधिकार इसे मिलेगा।

गोपाल सिंह विशारद को मिला रामलला की पूजा का अधिकार, 1986 में निधन हो चुका है निधनगोपाल सिंह विशारद

सुप्रीम कोर्ट ने आज राम जन्मभूमि-बाबरी मामले में विवादित भूमि मामले में ऐतिहासिक फैसला दे दिया है। कोर्ट ने विवादित जमीन को हिंदू पक्ष को देने का निर्णय लिया है। साथ ही कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया है। जबकि कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज कर दिया है। लेकिन साथ गोपाल सिंह विशारद का नाम भी चर्चा में आया है। जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रामलला की पूजा करने का अधिकार दिया गया है। गोपाल सिंह विशारद को 69 साल बाद कोर्ट ने पूजा का अधिकारी दिया है। लेकिन यह फैसला उनकी मौत के 33 साल बाद आया है। चलिए जानते हैं कौन हैं गोपाल सिंह विशारद जिनका 1986 में निधन हो चुका है।

कौन थे गोपाल सिंह विशारद?

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में रामलला की पूजा का अधिकारी हिंदू महासभा के गोपाल सिंह विशारद को दिया है। जब साल 1949 में बाबरी मस्जिद में मूर्तियों को रख दिया गया था। उसके बाद अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ला के रहने वाले गोपाल सिंह विशारद ने हिंदू महासभा की तरफ से रामलला दर्शन और पूजा के व्यक्तिगत अधिकार के लिए वर्ष 1950 में फैजाबाद कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।

गोपाल सिंह विशारद ने 16 जनवरी 1950 को सिविल जज कोर्ट में सरकार, जहूर अहमद और अन्य मुसलमानों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि जन्मभूमि पर स्थापित भगवान राम की मूर्ति एवं अन्य मूर्तियों को यहां से नहीं हटाया जाए। साथ कहा था कि दर्शन और पूजा के लिए जाने वालें लोगों को नहीं रोका जाए। मिली जानकारी के मुताबिक उस दिन सिविल जज ने यह स्थागनादेश जारी कर दिया।

जिसके बाद में मामूली संशोधनों के साथ जिला जज और हाई कोर्ट ने भी अनुमोदित कर दिया। वर्ष 1986 में गोपाल सिंह विशारद का निधन हो गया। इसके बाद केस की पैरवी विशारद के बेटे राजेन्द्र सिंह कर रहे थे। लेकिन खास बात यह थी कि रामलला विराजमान और अन्य की तरफ से अपील दायर की गईं। जोकि राजेंद्र सिंह (गोपाल सिंह विशारद) आदि के खिलाफ थी। अखिल भारतीय श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति और निर्मोही अखाड़ा भी गोपाल सिंह विशारद के बेटे राजेंद्र सिंह और अन्य के खिलाफ ताल ठोक रखी थी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में गोपाल सिंह विशारद की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पेश हुए थे। लेकिन बाद मे वकील रंजीत सिंह ने बहस की थी। रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था, उनका क्लाइंट रामलला का पुजारी है। वह मानते हैं कि जन्मस्थान के मालिक भगवान रामलला ही हैं। वह पूजारी (उपासक) है, उसे पूजा के लिए कानूनी अधिकार है। जोकि जारी रहना चाहिए। आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि रामलला की पूजा करने का गोपाल सिंह विशारद को दिया जाता है। अयोध्या का पहला कारसेवक के रूप में जाना जाता है। वह शुरू से ही हिंदू महासभा से जुड़े हुए थे।

गोपाल का बेटे कर सकते हैं पूजा

रामलला के मंदिर में पूजा का अधिकार गोपाल सिंह विशारद को मिला है। लेकिन उनकी मौत की स्थिति में अब ये अधिकार उनके परिवार के पास होगा। कानूनविदों का कहना है कि गोपाल सिंह विशारद को पूजा का अधिकार मिला है। तो ऐसे में उनके देहांत के बाद उनके उत्ताराधिकारी को यह अधिकार मिलेगा।



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