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अयोध्या विवाद : सुप्रीम कोर्ट में इन कारणों से 8 साल तक अटकी रही थी सुनवाई, बुधवार का दिन ऐतिहासिक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का मामला साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट पहुचा था। लेकिन इस मामले से जुड़े संबंधित दस्तावेजों को निचली कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में तीन साल का वक्त लगा।

अयोध्या विवाद (फोटो- सुप्रीम कोर्ट)अयोध्या विवाद (फोटो- सुप्रीम कोर्ट)

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि बुधवार को अयोध्या विवाद में लगातार सुनवाई का 40वां और अंतिम दिन था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का मामला साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट पहुचा था। लेकिन इस मामले से जुड़े संबंधित दस्तावेजों को निचली कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में तीन साल का वक्त लगा।

सुप्रीम कोर्ट में इन कारणों से अटकी रही थी सुनवाई

मामले से जुड़े सात भाषाओं में हजारों पेज के दस्तावेजों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद नहीं हो पाने के कारण सुनवाई कई साल लटकी रही। मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट को इस संदर्भ में 11 बार आदेश जारी करना था। इसके बाद ही 8 साल में सभी सात हजार पेज के दस्तावेजों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद हो सका।

हिन्दूओं के पक्ष में कोर्ट सुनाएगा फैसला

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा है कि हमें आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट अयोध्या विवाद में हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाएगा। जिस तरह से मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्टी की सुनवाई में खलल डालने की कोशिश की है, उसे देखते हुए बुधवार के दिन को ऐतिहासिक कहा जा सकता है।

राम मंदिर पर फैसले से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक

बता दें कि राम मंदिर फैसले से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तराखंड के हरिद्वार में 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक अपने सभी संगठनों के प्रचारकों की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसाबले और कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे। बता दें यह बैठक पांच साल में एक बार होती है। इस बैठक में आने वाले पांच साल को रोड मैप तैयार किया जाता है।

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