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Atal Bihari Vajpayee Jayanti: यहां पढ़ें अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक सफर, जब नेहरु जी भी हुये थे वाजपेयी के मुरीद...

Atal Bihari Vajpayee Jayanti: 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे अटल आपातकाल में जेल में गए व 1977 में जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बने, इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया।

Atal Bihari Vajpayee Jayanti: अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक सफर, जब नेहरु जी भी हुये थे वाजपेयी के मुरीद...
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Atal Bihari Vajpayee un Speech hindi

Atal Bihari Vajpayee Jayanti पूर्व प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को हुआ था। वह एक बेहतर राजनेता के साथ बहुत अच्छे कवि भी थे आज भी उनकी लिखी गई कविता जन-जन को प्रेरित करती है। 'काल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूं मैं गीत नया गाता और मैंने जन्म नहीं मांगा था किंतु मरण की मांग करुंगा, जाने कितनी बार जिया हूं जाने कितनी बार मरा हूं, जन्म मरण के फेरे से मैं इतना पहले नहीं डरा हूं।' ये वही कविता है जब अटल बिहारी वाजपेयी ने सुनाई थी तो तालियों की गड़गड़ाहट से समा बंध गई थी। अटल ली के भाषण को सभी राजनीतिक दल बड़े चावो से सुना करते थे। वह देश के एकमात्र ऐसे राजनेता थे, जो चार राज्यों के छह लोकसभा सीट से लड़ चुके थे। आइये एक नजर उनकी राजनीतिक सफर पर डाले:-

जब नेहरू जी ने अटल बिहारी वाजपेयी की थी तारीफ

ब्रिटिश दल के भारत आने पर नेहरु जी ने उनका परिचय कुछ यूं कराया था, यें हमारे विपक्ष के युवा नेता हैं, जो मेरे कटु आलोचना का कोई मौका नहीं खेाते, पर उनमें एक उज्जवल भविष्य देखता हूं। यानि अटल जी में नेहरु ने बहुत पहले ही भावी प्रधानमंत्री देख लिया था। इंदिरा गांधी ने कांगेस में आने को कहा पर अटल नही माने। अटल बिहारी वाजपेयी जीवट के धनी थे उन्होंने सारी दुनिया की परवाह किए बगैर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया, विपक्ष में रहकर भी संयुक्त राष्ट्रसंघ में देश का प्रतिनिधित्व किया, वहां पहली बार हिंदी का परचम लहराया।

1951 में अटल ने राजनीतिक सफर की थी शुरुआत

1951 में जनसंघ के संस्थापक सदस्य अटल ने अपनी कुशल वक्तृत्व शैली से राजनीति में रंग जमाया। वे लखनऊ में लोकसभा उप चुनाव हार गए, 1957 में जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया लखनऊ में हारे, मथुरा में जमानत जब्त हुई, लेकिन बलरामपुर से जीतकर दूसरी लोकसभा में पहुंचे, यह उनके अगले पांच दशकों के अटूट संसदीय करियर की शुरुआत थी। 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे अटल आपातकाल में जेल में गए व 1977 में जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बने, इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया।

1980 में वे बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे

1980 में वे बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे और 1986 तक अध्यक्ष व बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे। अटल बिहारी वाजपेयी नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए, दूसरी लोकसभा से तेरहवीं लोकसभा तक बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति भी रही। 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य रहे। 16 मई 1996 को पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को संख्या बल के आगे नतमस्तक होने के वक्तव्य के साथ त्यागपत्र दे दिया। 1999 में एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली इस बार वे पूरे कार्यकाल के प्रधानमंत्री रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में भारत एक सशक्त परमाणु शक्ति सपन्न राष्ट्र बना

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में भारत एक सशक्त परमाणु शक्ति सपन्न राष्ट्र बना और स्वच्छ सुशासन की राजनीति का उद्घोष हुआ। अटलजी महान राजनेता ही नहीं अपितु साहित्यकार, पत्रकार, संपादक व कुशल कवि तथा वक्ता भी थे। उनकी वकतत्व कला के लिए नेहरु व इंदिरा जैसे विपक्षी नेता भी उन पर फिदा रहे हैं, इसी वजह से विदेशमंत्री के रूप में वें सर्वाधिक लोकप्रिय हुए तथा विदेशों में व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को निखारने में अद्भुत योगदान दिया।

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