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असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना, कहा - मेरे साथ बहस करें, मैं हलवा नहीं लाल मिर्च हूं

ओवैसी ने कहा कि मैं यहां हूं, मेरे साथ बहस करें। इन लोगों के साथ क्यों बहस करनी है। दाढ़ी वाले से करो ना, हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर बहस और बात करेंगे।

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असदुद्दीन ओवैसी

सीएए के खिलाफ उठा तूफान अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ विपक्ष इस कानून के खिलाफ चल रहे अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही है, तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सरकार अपने फैसले को सही साबित करने और लोगों को जागरुक करने में जुटी है। और जब बात बीजेपी सरकार के खिलाफ चलने की हो तो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कैसे पीछे रह सकते हैं।

एक बार फिर कुछ ऐसा ही हुआ। लखनऊ में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में आयोजित एक रैली में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सीएए को किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा और जो प्रदर्शन कर रहें है वे करते रहें। इतना ही नहीं, जब उन्होनें विपक्ष के नेताओं को सार्वजनिक तौर पर बहस की चुनौती दे डाली तो एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पीछे कहां हटने वाले थे। उन्होनें भी चुनौती देते हुए कह दिया कि 'मैं यहां हूं..मेरे साथ बहस करें.. इन लोगों के साथ क्यों बहस करनी है.. दाढ़ी वाले से करो ना..हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर बहस और बात करेंगे।'

वो इतने ही पर नहीं नहीं रुके। आगे उन्होनें कहा कि 'भाजपा ने कहा है कि वह नाम बदलेंगे. मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि 'हलवा' शब्द कहां से आया है? यह अरबी शब्द है. यह हिंदी या उर्दू शब्द नहीं है. अब अरबी शब्द भी हटा दें.' उन्होंने कहा, 'वे (बीजेपी) कहते हैं कि वे नाम बदलेंगे. इंशाअल्लाह देश के लोग आपको बदलेंगे. याद रखें मैं हलवा नहीं लाल मिर्च हूं।'

अमित शाह ने लखनऊ की रैली में विपक्ष पर लोगों को सीएए के लिए 'गुमराह' करने का आरोप लगाया था और राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को सार्वजनिक तौर पर बहस करने की चुनौती दी थी।

इतना ही नहीं, असदुद्दीन ओवैसी ने लोगों को 'फेस रिकग्निशन ऐप' उपयोग न करने की भी सलाह दी। उन्होनें इसे नागरिकों की निजता को उल्लंघन बताया।

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