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Arvind Kejriwal Portfolio: अन्ना आंदोलन से राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल, दिल्ली में विजयी सफर बरकरार

Arvind Kejriwal Portfolio: रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल ने तीसरी बार अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है। एक बार फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला है। आईए जानते हैं उनके घर परिवार से लेकर राजनीतिक सफर की पूरी कहानी...

Arvind Kejriwal Portfolio: जानें तीसरी बार दिल्ली के सीएम बने अरविंद केजरीवाल की पूरी जीवन यात्राअरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal Portfolio: रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल ने तीसरी बार अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है। एक बार फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला है। इस बार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 62 सीटें जीती हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले 5 सीटें कम रहीं।

ऐसे में सीएम केजरीवाल के बारे में हर कोई जानना चाहता है। 1999 में केजरीवाल ने बिजली, आयकर और खाद्य राशन से जुड़े मामलों में नागरिकों की सहायता करने के उद्देश्य से एक गैर-सरकारी संगठन परिवर्तन की स्थापना की।

उन्होंने जमीनी स्तर पर सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाने और सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को लागू करने के लिए काम किया और 2006 में मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया।

अरविंद केजरीवाल ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम शुरू किया और देखते ही देखते दिल्ली के सीएम बन गए। अरविंद केजरीवाल ने पहली बार 28 दिसंबर 2013 में रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई। हालांकि, 49 दिन बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2015 में विधानसभा चुनाव हुए उसमें 67 सीटों से जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया।

व्यक्तिगत जीवन (Personal Life)

पूरा नाम- अरविंद केजरीवाल

जन्म तिथि- 16 अगस्त 1968

जन्म स्थान- सिवानी, हरियाणा

पार्टी का नाम- आम आदमी पार्टी

शिक्षा- स्नातक (आईआईटी)

पेशेवर प्रोफेशन- कार्यकर्ता, राजनीतिज्ञ

पिता का नाम- गोबिंद राम केजरीवाल

माता का नाम- गीता देवी

पति का नाम- सुनीता केजरीवाल

बच्चे - एक बेटी- हर्षिता और एक बेटा- पुलकित

अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर (Arvind Kejariwal Political Journey)

अरविंद केजरीवाल लगातार सोशल वर्क कर रहे थे। लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ उन्होंने जनलोक पाल के लिए लड़ाई लड़ी और इसी दौरान दोनों में मतभेद हुए। केजरीवाल ने जन लोकपाल बिल पास करवाने के लिए राजनीति में एंट्री की। जबकि अन्ना चाहते थे कि जन लोकपाल आंदोलन राजनीति से दूर रहे। दोनों में दूरियां आ गईं।

दूसरी तरफ केजरीवाल की राय थी कि विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के माध्यम से कोई प्रगति नहीं हुई। इसलिए सीधे राजनीति में शामिल होना आवश्यक था। इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम की एक संस्था ने इस संबंध में एक सर्वेक्षण किया। लोगों के समर्थन में की राजनीति में आना चाहिए। इसके बाद उन्होंने एक पार्टी बनाई। नाम दिया आम आदमी पार्टी और झाड़ू चुनाव चिन्ह् लिया। ताकि भ्रष्ट्राचार की सफाई और गंदगी के लिए झाड़ू चलानी जरूरी थी। इसके बाद 2 अक्टूबर 2012 को महात्मा गांधी की जयंती पर केजरीवाल ने एक राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की। उन्होंने उल्लेख किया कि पार्टी को औपचारिक रूप से 26 नवंबर 2012 को लॉन्च किया जाएगा।

इसके बाद पार्टी ने पहली बार 4 दिसंबर 2013 को दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा। अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से 15 साल तक विधायक रहीं शीला दीक्षित को हराया। जो लगातार तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहीं। उन्हें पहली बार 28 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद केवल 49 दिनों अंदर ही इस्तीफा दे दिया।

2014 में केजरीवाल ने लड़ा लोकसभा चुनाव

सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद लोकसभा चुनाव पर आप पार्टी की नजरे गईं। पद छोड़ने से एक महीने पहले केजरीवाल ने कहा था कि वह संसदीय चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन बाद में वो भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में वाराणसी सीट चुनाव लड़ और हार गए। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था। लगभग 4 लाख वोटों के अंतर से वो चुनाव हार गए।

2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी

लोकसभा का चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग ने नई तारीखों का ऐलान किया और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनाव की रणनीति बनाना शुरू कर दिया।

पार्टी ने चुनाव के लिए 62 उम्मीदवारों की सूची जारी की। बाद में इसने आठ नामों को और जोड़ा गया। इस बार के चुनाव बिलकुल अलग आए। पार्टी ने दिल्ली चुनाव में 67 सीटें जीतीं थी और तीन सीटें भाजपा ने जीतीं। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ और इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को क्लीन स्वीप कर आप ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की तो वहीं 8 पर भारतीय जनता पार्टी ने बढ़ती करते हुए जीत दर्ज की।

अरविंद केजरीवाल को अवार्ड (Arwind Kejariwal Awards)

1. 2004 में अशोक फेलो

2. 2005 में आईआईटी कानपुर ने उन्हें सत्येंद्र एल दुबे मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया।

3. 2006 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड

4. 2006 में सीएनएन आईबीएल से इंडियन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से नवाजा गया।

5. 2009 में आईआईटी खड़गपुर ने उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्र अवार्ड मिली।

6. 2009 में एसोसिएशन फॉर इंडिया के विकास ने अनुदान और फेलोशिप से सम्मानित किया।

7. 2010 में इकोनॉमिक टाइम्स अवार्ड्स से भी नवाजा गया।

8. 2011 में अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे को एनडीटीवी से इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड से नवाजा गया।

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