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Nipah Virus : केरल के जंगलों में निपाह वायरस का पता लगाने के लिए पहुंचा वैज्ञानिकों का दल

केरल में जानलेवा निपाह वायरस से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम लगातार काम कर रही है। निपाह के शक में अब तक 86 मामले पाए गए हैं। जिनमें से 1 मरिज के ब्लड सैंपल में यह वायरस पाया गया है। इस भयानक वायरस से निपटने के लिए केरल की इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड वायरोलॉजी के 8 वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की गई है जो इस वायरस के स्त्रोत का पता लगाएंगे।

Nipah Virus : केरल के जंगलों में निपाह वायरस का पता लगाने के लिए पहुंचा वैज्ञानिकों का दल

केरल में जानलेवा निपाह वायरस से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम लगातार काम कर रही है। निपाह के शक में अब तक 86 मामले पाए गए हैं। जिनमें से 1 मरिज के ब्लड सैंपल में यह वायरस पाया गया है। इस भयानक वायरस से निपटने के लिए केरल की इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड वायरोलॉजी के 8 वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की गई है जो इस वायरस के स्त्रोत का पता लगाएंगे।

वैज्ञानिकों का दल पता लगाने के लिए फल खाने वाले चमगादड़ों से नमूने (Sample) इकट्ठा करने के लिए केरल के उत्तरी पारावुर में पहुंच गए हैं। जहां वे इससे संबंधित शोध कर रहे हैं। बता दें कि इस वायरस का मुख्य स्त्रोत चमगादड़ होते हैं, इन्हें फ्रुट बैट भी कहा जाता है।

बता दें कि निपाह वायरस के संक्रमण से एक तरह का दिमागी बुखार हो जाता है। इसका संक्रमण तेजी के साथ फैलता है। रोगी को मात्र 48 घंटों यह वायरस कोमा में पहुंचा देता है। इससे संक्रमित होने वाले व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है साथ ही सिर में तेज दर्द होता है। इस वायरस की पहचान सबसे पहले साल 1998 में मलेशिया में हुई थी। उस समय मलेशिया में करीब 250 लोग से ज्यादा इसकी चपेट में आ गए थे। इसमें 40 फीसदी से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

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