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करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए एक दुस्वप्न जैसी थी तीन तलाक प्रथाः अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक पर कई बार कई फोरम पर मेरा बोलना हुआ है। मगर आज तीन तलाक पर बोलते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि यह पारित हो चुका है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक प्रथा करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए एक दुस्वप्न जैसी थी। उनको अपने अधिकारों से वंचित रखने की प्रथा थी।

करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए एक दुस्वप्न जैसी थी तीन तलाक प्रथाः अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक पर कई बार कई फोरम पर मेरा बोलना हुआ है। मगर आज तीन तलाक पर बोलते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि यह पारित हो चुका है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक प्रथा करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के लिए एक दुस्वप्न जैसी थी। उनको अपने अधिकारों से वंचित रखने की प्रथा थी।

शाह ने आगे कहा कि तीन तलाक के पक्ष में जो खड़े हैं और जो इसके विरोध में खड़े हैं, उन दोनों के ही मन में इसको लेकर कोई संशय नहीं है कि तीन तलाक एक कुप्रथा है। कोई भी कुप्रथा हो, जब उसे निर्मूल किया जाता है तो उसका विरोध नहीं होता बल्कि उसका स्वागत होता है लेकिन तीन तलाक कुप्रथा को हटाने के खिलाफ इतना विरोध हुआ। इसके लिए तुष्टिकरण की राजनीति, उसका भाव जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि वोटबैंक के आधार पर सालोंसाल सत्ता में आने की आदत कुछ राजनीतिक पार्टियों को पड़ गई। इसी वजह से ऐसी कुप्रथाएं इस देश में चलती रहीं। इस देश के विकास और सामाजित समरसता के आड़े भी तुष्टिकरण की राजनीति आई है। इसके पक्ष में बात करने वाले कई तरह के तर्क देते हैं। उसके मूल में वोटबैंक की राजनीति और शॉर्टकट लेकर सत्ता हासिल करने की पॉलिटिक्स है।

उन्होंने आगे कहा कि जब आप समाज के विकास की परिकल्पना लेकर जाते हैं तो उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है, प्लानिंग करनी पड़ती है। इसके लिए आपके मन में संवेदना चाहिए, वोटों का लालच नहीं। जिनके मन में न मेहनत का भाव है और न ही संवेदना है, वे लोग तुष्टिकरण जैसे शॉर्टकट को अपनाते हैं और वोटबैंक की राजनीति करते हैं। जो अभाव में जी रहा है, जो गरीब-पिछड़ा, वो किसी भी धर्म का हो। विकास के दौर में जो पिछड़ गया है, उसे ऊपर उठाओ, अपने आप समाज सर्वस्पर्शी-सर्वसमावेशी मार्ग पर आगे बढ़ जाएगा।

शाह ने कहा कि जो राजनीति 60 के दशक के बाद कांग्रेस ने शुरू की और बाकी दलों ने भी उसका अनुसरण किया, उसका असर देश के लोकतंत्र, समाजिक जीवन और गरीबों के उत्थान पर पड़ा है। मूल आघात करने की जरूरत तुष्टिकरण की राजनीति पर है। 2014 में इस देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत देकर तुष्टिकरण की राजनीति के अंत की शुरूआत कर दी।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बगैर तुष्टिकरण यह सरकार समविकास, सर्वस्पर्शी विकास, सर्वसमावेशी विकास के आधार पर पांच साल चली। इसी थ्योरी पर 2019 में ठप्पा लगाकर इस देश की जनता ने तुष्टिकरण से देश को हमेशा के लिए मुक्त करने के लिए दोबारा बहुमत दिया है। इसी बहुमत के आधार पर भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन तलाक की कुप्रथा को खत्म करने का काम किया है।

उन्होंने आगे कहा कि दुहाई दी जाती है कि तीन तलाक मुस्लिम शरीयत का अंग है, हमारे धर्म के रीति-रिवाजों में दखल न दिया जाए। मैं आज बताना चाहता हूं बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मोरक्को, इंडोनेशिया, श्रीलंका, जॉर्डन समेत 19 देश ऐसे हैं जिन्होंने 1922-1963 तक तीन तलाक खत्म कर दिया।

शाह ने कहा कि हमें इस कुप्रथा को खत्म करने में 56 साल लग गए। इसका कारण कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति है। अगर यह इस्लाम संस्कृति का हिस्सा होता तो इस्लामिक देश इसे क्यों हटाते। यही बताता है कि यह प्रथा गैर-इस्लामिक है। इसे इस्लाम का समर्थन प्राप्त नहीं है। मैं मानता हूं कि मोदी सरकार ने अपने साढ़े पांच साल के कार्यकाल में 25 से ज्यादा ऐतिहासिक निर्णय लेकर इस देश की दिशा बदलने का काम किया है। यह मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है।

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