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नासा से पहले चेन्नई के इस खगोल विज्ञानी ने खोजा था चंद्रयान 2 का मलबा, शौकिया तौर पर है खगोल विज्ञानी

अंतरिक्षण एजेंसी नासा (NASA) ने चंद्रयान दो (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) का मलबा मिलने की पुष्टि की है। लेकिन नासा से पहले चेन्नई के खगोल विज्ञानी शनमुगा सुब्रमण्यम (Astronomer Shanmuga Subramanian) ने इसका पता लगा लिया था। नासा ने सिर्फ इसकी पुष्टि की है।

नासा से पहले चेन्नई के इस खगोल विज्ञानी ने खोजा था चंद्रयान 2 का मलबा, शौकिया तौर पर है खगोल विज्ञानीनासा से पहले चेन्नई के खगोल विज्ञानी शनमुगा सुब्रमण्यम ने खोजा चंद्रयान 2 का मलबा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने चंद्रयान दो (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) का मलबे की पुष्टि की है। नासा से पहले चेन्नई (Chennai) के खगोल विज्ञानी ने मलबा खोज निकाला था। जिसके सबूत नासा को सौंपने के बाद अंतरिक्ष एजेंसी ने इसकी पुष्टि की। साथ ही चेन्नई निवासी खगोल विज्ञानी का धन्यवाद जताया है।

चेन्नई निवासी शनमुगा सुब्रमण्यम (Astronomer Shanmuga Subramanian) ने सबसे पहले विक्रम लैंडर के मलबे को खोज निकाला था। लेकिन शौकिया खगोल विज्ञानी होने के कारण किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद सबूत नासा को भेजे तो पुष्टि होने के बाद सभी उसे गंभीरता से ले रहे हैं। शनमुगा सुब्रमण्यम ने कहा है कि चंद्रमा के विशेष स्थान पर मुझे कुछ मिला। जिसकी जांच के बाद ऐसा लगा कि यह मलबा है। जिसके बाद और प्रयास करने पर मलबे के बारे में सुनिश्चित हुआ। लेकिन अब मुझे नासा से पुष्टि मिली है।

28 सितंबर को खोज निकाला था

भारतीय खगोल विज्ञानी शनमुगा सुब्रमण्यम ने इसे 28 सितंबर को ही खोज निकाला था। जिसके संबंध ट्विट कर जानकारी भी दी थी। शनमुगा ने कहा कि चंद्रयान 2 का विक्रम लैंडर मिल गया है। लगभग सुनिश्चित भी हो गया है। एलआरओ की तस्वीरें देखिए। पुरानी और नई तस्वीर के बीच अंतर देखिए।

पांच दिन के भीतर खोज निकाला

शनमुगा सुब्रमण्यम ने कहा कि खोज करने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे तक समय दिया। 4 से 5 दिन इसे खोजने में लगे। उन्होंने कहा कि इसे कोई भी खोज सकता था जिसे इसकी सही जानकारी होती। इससे काफी लोग प्रभावित होंगे। विक्रम लैंडर के लैंड करने की निश्चित जगह से करीब 1 किलोमीटर दूर मिला है।

मैकेनिकल इंजीनियर है शनमुगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनमुगा मैकेनिकल इंजीनियर हैं। इसके अलावा कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के भी अच्छे जानकार हैं। वह शौकिया तौर पर खगोल विज्ञान से जुड़ी खोज भी करते रहते हैं। शौकिया खोज के चलते ही पांच दिन के भीतर उन्होंने चंद्रयान दो के मलबे को खोज निकाला।

87 दिन के बाद मिला मलबा

चंद्रयान दो के विक्रम लैंडर का मलबा करीब तीन माह बाद मिला है। 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर से संपर्क इसरो का टूट गया था। इसके बाद 2 और 3 दिसंबर की देर रात नासा ने मलबा मिलने की पुष्टि की। साथ ही इसके संबंध में ट्विट कर जानकारी दी गई।

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