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Ahmed Patel News : कांग्रेस के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अहमद पटेल को क्यों नहीं मिला कभी मंत्री पद, जानें क्या थी बड़ी वजह

Ahmed Patel News : अहमद पटेल ने तालुका पंचायत अध्यक्ष के पद से राजनीतिक का सफर शुरू किया और अपने जीवन काल में आठ बार सांसद रहे। गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर में 21 अगस्त 1949 को पैदा हुए अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे।

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कांग्रेस के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अहमद पटेल को क्यों नहीं मिला कभी मंत्री पद

Ahmed Patel News : कांग्रेस के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अहमद पटेल की 71 साल में निधन हो गया। अहमद पटेल तालुका पंचायत अध्यक्ष के पद से राजनीतिक का सफर शुरू किया और अपने जीवन काल में आठ बार सांसद रहे। गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर में 21 अगस्त 1949 को पैदा हुए अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे। वह 1977 में आपातकाल के दौरान 26 साल की उम्र में ही लोकसभा पहुंचे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन दुर्भाग्यवश गांधी परिवार के तीन पीढ़ियों के साथ काम करने बावजूद कभी मंत्री नहीं बन सके।

सोनिया गांधी को राजनीति में स्थापित करने का श्रेय अहमद पटेल को ही जाता है

बताया जाता है कि सोनिया गांधी को राजनीति में स्थापित करने का श्रेय अहमद पटेल को ही जाता है। वह सोनिया गांधी के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके है। 90 के दशक में कांग्रेस के लिए संकट मोचन के तौर पर भी अहमद पटेल उभरे थे। 1977 आपातकाल लगने के बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की साख बचाने का काम अहमद पटेल ने ही किया था। वह गुजरात के भरुच लोकसभा में सबसे युवा सांसद बनकर पहुंचे थे। इसके बाद 1980 और 1984 में इसी भरुच सीट से जीतकर सांसद पहुंचे थे। 1980 में कांग्रेस की वापसी के बाद जब इंदिरा गांधी ने अहमद को कैबिनेट में शामिल करना चाहा, तो उन्होंने संगठन में काम करने को प्राथमिकता दी।

कांग्रेस के 2004 से 2014 तक लोकसभा चुनाव जीतने में अहमद पटेल का था अहम योगदान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को 10 जनपथ का चाणक्य कहा जाता था। गांधी परिवार के सबसे करीब और कांग्रेस के बेहद ताकतवर असर वाले अहमद सादगी में रहते थे और खुद को शांत रखते थे। गांधी परिवार के अलावा किसी को नहीं पता कि उनके दिमाग में चल रहा है और वह कब क्या करेंगे। 2004 से 2014 तक जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब अहमद पटेल की राजनीतिक ताकत सभी ने देखी थी। कांग्रेस संगठन ही नहीं बल्कि सूबे से लेकर केंद्र तक में बनने वाली सरकार में कांग्रेस नेताओं का भविष्य भी अहमट पटेल तय करते थे। यूपीए सरकार में पार्टी की बैठकों में सोनिया जब भी ये कहतीं कि वो सोचकर बताएंगी, तो मान लिया जाता कि वो अहमद पटेल से सलाह लेकर फैसला करेंगी। यहां तक कि यूपीए कई फैसले पटेल की सहमति के बाद लिए गए। यही नहीं कांग्रेस की कमान भले ही गांधी परिवार के हाथों में रही हो, लेकिन अहमद पटेल के बिना कांग्रेस में कुछ भी नहीं होता था। इनके इशारे पर ही सभी फैसले लिये जाते थे।

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