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आईआईटी काउंसिल की 53वीं बैठक में महत्वपूर्ण फैसला, IIT में M.Tech के लिए ली जाएगी समान फीस

आईआईटी (IIT) में एक्सीलेंस को बढ़ावा देने के लिए सभी नई नियुक्तियों (New Appointments) को टेन्योर ट्रेक सिस्टम के जरिए करने का निर्णय लिया गया है। इसमें संस्थानों की तरफ से पीएचडी के बाद तीन साल के अनुभव वाले उम्मीदवार को चुने जाने की बाध्यता नहीं होगी।

आईआईटी काउंसिल की 53वीं बैठक में महत्वपूर्ण फैसला, सभी IIT में M.Tech के लिए ली जाएगी समान फीस
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53rd meeting of IIT Council: Important Decision To Same Fees Will Be Taken For M.Tech In All IITs

आने वाले दिनों में देश के सभी 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में एमटेक पाठ्यक्रम के लिए एक समान फीस ली जाएगी। इस बाबत शुक्रवार को राजधानी में हुई आईआईटी काउंसिल (IIT Council) की 53वीं बैठक में एक अहम निर्णय लिया गया है, जिसमें काउंसिल ने एमटेक पाठ्यक्रम में सुधार को लेकर गठित की गई तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। एक समान फीस का सुझाव भी इन्हीं सिफारिशों में दिया गया था। यह व्यवस्था आईआईटी संस्थानों में बीटेक के लिए ली जाने वाली समान फीस की प्रक्रिया की तर्ज पर लागू की जाएगी।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुताबिक बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय एमएचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की। इसमें मंत्रालय में राज्य मंत्री संजय धोत्रे, आईआईटी संस्थानों के निदेशक, अध्यक्ष और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कुछ और महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए जिसमें संस्थानों को उद्योग जगत की जरुरतों के हिसाब से प्रायोजित छात्र और प्रायोजित कार्यक्रमों की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर देने को कहा गया है।

शैक्षणिक दृष्टि से कमजोर छात्रों को डिग्री प्रोग्राम के दूसरे सेमिस्टर के बाद संस्थान छोड़ने का विकल्प दिया जा सकता है। बजाय इसके कि उन्हें प्रोग्राम से जबरदस्ती बाहर किया जाए। सभी आईआईटी संस्थान व्यक्तिगत रूप से इससे जुड़ी हुई बारीकियों को तय करेंगे।

शोध को मिलेगा बढ़ावा

सभी आईआईटी संस्थान अपनी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को सुधारने के लिए शोध कार्य में सुधार करेंगी। इसके लिए वह अलग से अपना एक एक्शन प्लान भी तैयार करेंगे। आईआईटी संस्थानों को वैश्विक शैक्षणिक हब बनाने के लिए विदेशी छात्रों (विदेशी पासपोर्ट के साथ ओसीआई कार्ड होल्डर्स हैं और विदेशों में पढ़ रहे हैं) को जेईई एडवांस परीक्षा में सीधे प्रवेश दिया जाएगा। आईआईटी एक छात्रवृति योजना बनाएगी जिसके जरिए प्रतिभावान विदेशी छात्रों को इन संस्थानों में पढ़ने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा देश और विदेश में ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। विदेशी फैकेल्टी की नियुक्ति को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया को सरलीकृत किया जाएगा। आईआईटी की छात्रावास सुविधा में सुधार करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा जिसमें पुराने हो चुके छात्रावासों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके लिए हीफा के जरिए अलग से फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा जहां पीपीपी मॉडल को लागू करने की गुंजाइश होगी उसे भी किया जाएगा। आईआईटी दिल्ली ने इसकी शुरुआत की है।

नियुक्तियों की निगरानी

आईआईटी में एक्सीलेंस को बढ़ावा देने के लिए सभी नई नियुक्तियों को टेन्योर ट्रेक सिस्टम के जरिए करने का निर्णय लिया गया है। इसमें संस्थानों की तरफ से पीएचडी के बाद तीन साल के अनुभव वाले उम्मीदवार को चुने जाने की बाध्यता नहीं होगी। लेकिन इस प्रकार से आने वाले फैकेल्टी सदस्यों की तीन साल के बाद इंर्टनल रिव्यू कमेटी द्वारा समीक्षा की जाएगी। साथ ही पांच वर्ष बाद एक बाहरी रिव्यू कमेटी के निर्णयों के आधार पर इनकी नियुक्ति को बनाए रखने और उच्च-ग्रेड पर पद्दोन्नति करने का फैसला लिया जाएगा।



पहले और दूसरी पीढ़ी के आईआईटी संस्थानों के फैकेल्टी का दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले तीसरी पीढ़ी के संस्थानों में प्रयोग नहीं किया जाएगा। आईआईटी से पढ़कर निकलने वाले छात्रों को विदेशों में डिग्री की मान्यता संबंधी कोई समस्या न हो। उसके लिए काउंसिल ने तय किया है कि बाहरी रिव्यू कमेटी द्वारा एनबीए के निधार्रित फॉर्मेट के हिसाब से आईआईटी की एक समीक्षा की जाएगी। उसके बाद एनबीए संस्थान को एक्रीडिटेशन देगा। कमजोर वर्ग के छात्रों को एक अतिरिक्त वर्ष की सुविधा के साथ छात्रवृति दी जाएगी।

प्रत्येक आईआईटी एक महीने के अंदर अपनी विशेषज्ञता से जुड़े हुए एक एरिया का चुनाव करके मंत्रालय को सूचित करेगा। इन क्षेत्रों में संस्थानों को देश की बेहतरीन शोध सुविधा को स्थापित करना होगा। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने आईआईटी और आईआईएससी के पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए रूची रखने वाले विदेशों छात्रों के लिए एक कॉमन एडमिशन पोर्टल भी लांच किया।

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