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2001 Parliament Attack: जानिए उन 40 मिनट के बारे में जब गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था संसद भवन

2001 Parliament Attack: 13 दिसंबर, 2001 को काला दिन के रूप में देखा जाता है। इस दिन लश्कर-ए-तैयबा के 5 आतंकियों ने संसद भवन को निशाना बनाया था। इन पांचों आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने अपनी प्राणों की आहुति देते हुये संसद भवन और नेताओं की जान बचाई थी।

2001 Parliament Attack: जानिए उन 40 मिनट के बारे में जब गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था संसद भवन
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गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था संसद भवन

(2001 Parliament Attack) संसद पर हमले की आज 19वीं बरसी है। आइये एक झलक उस दिन की घटना को याद करे जब कुछ आतंकवादियों ने पूरी दिल्ली को हिला कर रख दिया था। भारतीय इतिहास का वह दिन जब लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले संसद में गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा भवन गूंज उठा था। 13 दिसंबर, 2001 को काला दिन के रूप में देखा जाता है। इस दिन लश्कर-ए-तैयबा के 5 आतंकियों ने संसद भवन को निशाना बनाया था। इन पांचों आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने अपनी प्राणों की आहुति देते हुये संसद भवन और नेताओं की जान बचाई थी।

इस हमले में 9 लोगों की हुई थी मौत

आपको बता दें कि इस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दिल्ली पुलिस के छह जवान, दो संसद सुरक्षा सेवा के जवान और एक माली शामिल थे। आपको ज्ञात हो तो उस दिन संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। बड़े से बड़े नेता उस समय संसद में मौजूद थे जब ये हमला हुआ तो दोनों सदनों को 40 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था। ये वहीं 40 मिनट थे जब आतंकवादियों ने संसद में गोलीबारी करने लगे थे। इन गोलियों की आवाज ने पूरे देश को सुन कर दिया था। इन आतंकी हमले में नौ लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दिल्ली पुलिस के 6 जवान, 2 संसद सुरक्षा सेवा के जवान और 1 माली शामिल थे।

दोनों सदनों की कार्यवाही 40 मिनट के लिए कर दी गई थी स्थगित

11 बजकर 28 मिनट पर संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कार्यवाही 40 मिनट के लिए रोक दी गई थी। संसद में उस समय शीतकालीन सत्र चलने की वजह से दिग्गज नेता मौजूद थे, लेकिन सदन स्थगित होते ही तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और नेता प्रतिपक्ष सोनिया गांधी परिसर से जा चुके थे। कार्यवाही स्थगित होने के कारण सांसद भवन से निकलने लगे थे, उसी समय गोलियों की आवाज से परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि परिसर में मीडिया भी मौजूद था जो सत्र को कवर करने आई थी उन्होंने ने भी इस खौफनाक मंजर को कवर किया था।

सफेद एंबेस्डर कार में आए थे पांच आतंकवादी

गेट पर मौजूद सुरक्षाबलों ने बहादुरी से उन आतंकवादियों का सामना किया था। गौरतलब है कि 19 साल पहले हुए इस हमले की याद आज भी ताजा है। जो हमें जागने को मजबूर करती हैं। ये आतंकवादी सफेद एंबेस्डर कार में आए थे जिन्होंने 45 मिनट तक संसद भवन में दहश्त मचा दी थी। जिसके निशान आज भी कहीं न कहीं संसद भवन के उन फिजाओं में मौजूद है।

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