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2030 तक भारत में होगी सबसे अधिक बारिश और फिर भी पड़ेगा सूखा, तापमान में होगी बढ़ोत्तरी

2030 में यदि वैश्विक उत्सर्जन सामान्य रहता है तो दक्षिण एशिया में 1 डिग्री से कम तापमान बढ़ेगा।

2030 तक भारत में होगी सबसे अधिक बारिश और फिर भी पड़ेगा सूखा, तापमान में होगी बढ़ोत्तरी
नई दिल्ली. बाढ़ से उत्तर भारत में 28 और नेपाल में 100 से ज्यादा लोग मारे गये हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले हजारो लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले कुछ वर्षों में पर्यावरण परिवर्तन होने से हिमालय में पानी की समस्या और भी ज्यादा बढ़ेगी। बैंक ने कहा है कि 2050 में दक्षिण एशिया के देशों की अर्थव्यवस्था में कमी होगी और जीडीपी 1.8 प्रतिशत हो जायेगी और 2100 में 8.8 तक ही रहेगी। सोचना मुश्किल है कि इस शताब्दी में आगे कहा तक जायेंगे लेकिन यह जान सकते है 2030 में भारत कैसा दिखेगा।
भारत में 1.5 और 2 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाएगा। पानी की समस्या और भी ज्यादा बढेंगी।अगर दुनिया कार्बन डायऑक्साइड पर नियंत्रण करने का एक्शन ले और अगले दशक तक कुछ सुधार करे तो बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका को 2030 तक पानी मिलेगा। भारत में बहुत बारिश होगी। बारिश तेज होगी जिससे बाढ़ जैसी स्थिति रहेगी और कही सुखा पड़ेगा। तापमान अधिक होने के कारण नदियों का पानी भाप बनकर उड़ने लगेगा और नदियां सूख जायेंगी।
मिजोरम, मणिपुर और मध्य प्रदेश में औसत से 2 डिग्री तापमान ज्यादा है। झुलसाने वाली गर्मी के बाद दिल्ली में 40 प्रतिशत से भी कम बारिश होगी। केरल औऱ उत्तर-पूर्व में 20प्रतिशत ज्यादा बारिश होगी।तापमान में अस्थिरता के कारण भारत में होने वाली कृषि, मुख्य रूप से चावल की खेती प्रभाव पड़ेगा। तापमान में 1 प्रतिशत की वृद्धि से चावल को लाभ होगा ले किन वातावरण में बढ़ता कार्बनडाइऑक्साइड वैश्विक तापमान को बढ़ा रहा है। एडीबी ने विश्लेषित किया कि उत्तर-पूर्व चावल उत्पाद में टकराव देखेगा, दक्षिणी राज्यों में चावल में 5 प्रतिशत कमी होगी।
2030 में यदि वैश्विक उत्सर्जन सामान्य रहता है तो दक्षिण एशिया में 1 डिग्री से कम तापमान बढ़ेगा। भारत में डेंगू और दस्त जैसी बिमारियां ज्यादा होगी लेकिन मलेरिया जैसी बीमारियों का कम प्रभाव होगा। इन सब समस्याओं और तकनीक में अग्रसर होने के बावजूद भारत को 5 प्रतिशत बिजली की कमी का सामना करना पडेंगा, अगर पर्यावरण गतिविधियों में परिवर्न नही किया तो। भारत को 8बिलियन डॉलर को खर्च करना पड़ेगा बिजली की कमी को रोकने के लिए।

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