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बांग्लादेश बनने के बाद POK पर कब्जा कर सकती थीं इंदिरा: रिपोर्ट

सीआइए के मुताबिक, इंदिरा गांधी पीओके पर कब्जे के लिए पश्चिम पाक पर हमले का आदेश दे सकती थीं।

बांग्लादेश बनने के बाद POK पर कब्जा कर सकती थीं इंदिरा: रिपोर्ट
नई दिल्ली. 46 साल बाद अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से हाल में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि बांग्लादेश बनाने का भारत का अभियान पूरा होने के बाद अमेरिका ने सोचा था कि तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पाक अधिकृत कश्मीर, पीओके पर कब्जे के लिए पश्‍चिम पाकिस्तान पर हमले का आदेश दे सकती हैं।
बता दें कि यह खुलासा अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से हाल ही में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से हुआ है। आपको बता दें कि भारत ने 1971 में पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से को पड़ोसी देश से अलग कर बांग्लादेश के रूप में एक नए देश के गठन में प्रमुख भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट की जानकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन के स्पेशल ऐक्शन ग्रुप की एक बैठक में सीआईए के तत्कालीन निदेशक रिचर्ड होम्स ने कहा कि ‘यह बताया गया है कि मौजूदा कार्रवाई को खत्म करने से पहले इंदिरा गांधी पाकिस्तान के हथियारों और वायुसेना की क्षमताओं को खत्म करने की कोशिश करने पर विचार कर रही हैं।’
पूर्वी पाकिस्तान में भारत की सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बिगड़ने के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी ए किसिंजर ने कई संभावनाओं पर चर्चा की थी। बहरहाल, वॉशिंगटन में कुछ शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को लगा था कि भारत की ओर से पश्‍चिम पाकिस्तान पर हमला करने की संभावना बहुत कम है।
दरअसल, पिछले सप्‍ताह ही सीआईए ने करीब एक करोड़ 20 लाख दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है. भारत संबंधी खुलासों का ये दस्तावेज उन्हीं में शामिल हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, निक्सन ने पूर्वी पाकिस्तान में युद्ध के हालात में आर्थिक सहायता बंद करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अमेरिकी प्रशासन को पता ही नहीं था कि इसे लागू कैसे करना है।
17 अगस्त 1971 को शीर्ष रक्षा एवं सीआईए अधिकारियों की एक बैठक में किसिंजर ने कहा था कि राष्ट्रपति और विदेश मंत्री दोनों ने भारतीयों को चेताया है कि युद्ध की स्थिति में हम आर्थिक सहायता बंद कर देंगे। लेकिन क्या हमें इसका मतलब पता है? किसी ने इसके नतीजों पर गौर नहीं किया है या सहायता बंदी लागू करने के मतलब का पता नहीं लगाया है। तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किसिंजर इस बात से भी नाखुश थे कि सीआईए के पास इस बाबत पर्याप्त सूचना नहीं थी कि चीनी, भारतीय और पाकिस्तानी क्या करने वाले हैं।

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