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माल्या पर शिकंजे की कोशिशें तेज, भारत ने प्रत्यर्पण में ब्रिटेन से मदद मांगी

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ चल रहे प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटेन की सरकार से सहयोग की आज मांग की।

माल्या पर शिकंजे की कोशिशें तेज, भारत ने प्रत्यर्पण में ब्रिटेन से मदद मांगी

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ चल रहे प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटेन की सरकार से सहयोग की आज मांग की। माल्या धोखाधड़ी से जुड़े मामलों तथा करीब नौ हजार करोड़ रुपये की मनी लौंड्रिंग के सिलसिले में भारत में वांछित हैं।

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किरण रिजिजू ने ब्रिटेन के सुरक्षा व आर्थिक अपराध मामलों के मंत्री बेन वॉलेस के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में रिजिजू को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में माल्या की चल रही सुनवाई के बारे में अवगत कराया गया।

बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘रिजिजू ने विजय माल्या के यथाशीघ्र प्रत्यर्पण के लिए सहयोग की मांग की।' रिजिजू ने बाद में ट्वीट किया, ‘‘बेन वॉलेस के साथ द्विपक्षीय बैठक फलदायी रही। हमने साइबर सुरक्षा, चरमपंथ, वांछित लोगों के प्रत्यर्पण तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की।'

बैठक में मौजूद अधिकारी ने बताया कि रिजिजू ने माल्या, ललित मोदी, क्रिकेट बूकी संजीव कपूर समेत 13 लोगों के प्रत्यर्पण में मदद की मांग की। रिजिजू ने यह भी मांग की कि कश्मीरी या खालिस्तानी अलगाववादियों द्वारा ब्रिटेन की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं किया जाए।

उल्लेखनीय है कि मामले में अंतिम सुनवाईयों के लिए माल्या लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में लौटेंगे। न्यायाधीश एम्मा अरबुथनॉट इस मामले में भारत सरकार की ओर से पेश कुछ सबूतों को ‘स्वीकार करने या ना करने' के बारे में फैसला सुनाएंगी।

उम्मीद है कि वह इस बारे में अपने फैसले की समय तालिका भी तय करेंगी कि ब्रिटेन के कारोबारी को आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है या नहीं। बैठक में प्रत्यर्पण मामले के अलावा बढ़ते रूढ़िवाद और सिख चरमपंथ जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।

एक अधिकारी ने बताया,‘‘ मंत्री ने सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा जारी रखने के लिए वॉलेस को भारत आमंत्रित किया। '
खबरों के मुताबिक ब्रिटेन की सरकार ने कथित तौर पर इस्लामी आतंकवाद पर भारत के अनुभव से सीखने में भी दिलचस्पी दिखाई। खासकर इसलिए क्योंकि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देशों में से एक है जहां इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के कट्टरपंथी तत्वों की संख्या सबसे कम है।
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