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भारत की सबसे ताकतवर सबमरीन्स का डाटा लीक

यह फ्रांसीसी रक्षा सौदों के कॉन्ट्रैक्टर डीसीएनएस द्वारा डिज़ाइन की गई थी।

भारत की सबसे ताकतवर सबमरीन्स का डाटा लीक
नई दिल्ली/सिडनी. भारत के स्कॉर्पीन सबमरीन्स का डेटा लीक हो गया है। व्यापक रूप से अपने पनडुब्बियों के गोपनीय डेटा लीक होने के कारण फ्रेंच डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर डीसीएनएस बुरी तरह से घिर गया है। इस लीक के कारण इंडिया, चिली और मलयेशिया के लिए बेचैनी बढ़ सकती है। ऑस्ट्रेलियन न्यूजपेपर ने बुधवार को इसका खुलासा किया है।
आपको बता दें कि, यह फ्रांसीसी रक्षा सौदों के कॉन्ट्रैक्टर डीसीएनएस द्वारा डिज़ाइन की गई और भारत में मझगांव डॉक पर बनाई जा रही थी। लड़ाकू क्षमता वाले स्कॉर्पीन-क्लास के सबमरीन्स का डिजाइन इंडियन नेवी के लिए किया गया था। इसके कई पार्ट का इस्तेमाल चिली और मलेशिया भी करते रहे हैं। इस 22,400 पन्नों के इस प्रोजेक्ट में सारी जानकारियां थी कि किस प्रकरा से यह समुद्र की गहराई तक पहुंच कर सूचना दे सकता है।
स्कॉर्पीन कालवारी की लंबाई 216 फीट है। इसकी चौड़ाई 20 फीट है। 6 स्कॉर्पीन सबमरीन्स बनाने के लिए दोनों पक्षों में $3.5 बिलियन (करीब 23,400 करोड़ रुपए) में करार हुआ था। इन्हें 2020 तक नेवी को सौंप देने का टारगेट है।
3.5 अरब अमेरिकी डॉलर के इस सौदे के तहत बनने वाली कुल 6 पनडुब्बियों में से पहली आइएनएस कलवरी इस समय मुंबई में बनाई जा रही है। इन पनडुब्बियों को अपनी तरह की पनडुब्बियों में सबसे आधुनिक माना जाता है। ये पानी के भीतर इतनी कम आवाज़ करती हैं कि इनकी भनक लगना नामुमकिन न सही, बेहद मुश्किल ज़रूर होता है।
22,400 पेज के इस खुलासे में ऑस्ट्रेलियन न्यूजपेपर का कहना है कि लड़ाकू क्षमता वाले स्कॉर्पीन-क्लास के सबमरीन्स का डिजाइन इंडियन नेवी के लिए किया गया था। इसके कई पार्ट का इस्तेमाल चिली और मलेशिया भी करते रहे हैं। ब्राजील को भी 2018 में ये जहाज मिलने वाले थे। जानकारी के मुताबिक, यह डाटा भारत के बाहर हैकर्स द्वारा लीक किया गया है।
लीक मामले पर गंभीरता जताते हुए भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा, 'यदि यह लीक हमसे संबंधित है तो पहला कदम इसे चिह्नित करना होगा। ऐसे भी यह 100 फीसदी लीक नहीं हुआ है। इस लीक की जानकारी मुझे आधी रात को मिली। यह हैकिंग का मामला है।'
इस डेली न्यूजपेपर ने कहा, 'ऐसा माना जा रहा है कि फ्रांस ने 2011 में ही इस डेटा को हटा दिया था। ऐसा पूर्व फ्रेंच नेवी ऑफिसर और तब के डीसीएनएस सबकॉन्ट्रैक्टर ने किया था। न्यूजपेपर का कहना है कि डेटा फर्म्स के जरिए साउथईस्ट एशिया आया और आखिर में आस्ट्रेलिया में एक कंपनी के पास पहुंचा। डीसीएनएस वेबसाइट का कहना है कि नया जहाज फ्रांस के सबसे संवेदनशील और संरक्षित पनडुब्बी टेक्नॉलजी है। ये बेहद घातक सबमरीन्स हैं।'
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