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गणतंत्र दिवस 2018: ये हैं भारत का तिरंगा फहराने के 10 सही नियम-कानून

भारत का राष्ट्रीय ध्वज है, तीन रंगों से बना है, इसलिए इसे तिरंगा कहा जाता है।

गणतंत्र दिवस 2018: ये हैं भारत का तिरंगा फहराने के 10 सही नियम-कानून

भारत का राष्ट्रीय ध्वज है, तीन रंगों से बना है, इसलिए इसे तिरंगा कहा जाता है। तिरंगे में सबसे ऊपर गहरा केसरिया, बीच में सफ़ेद और सबसे नीचे गहरा हरा रंग बराबर अनुपात में है। ध्‍वज को साधारण भाषा में झंडा भी कहा जाता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे तिरंगे को फहराने के सही नियम और कानून। अगर नहीं जानते है तो हम आपके लिए लाए हैं वो नियम और कानून, जिनके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जाते हैं।

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ये हैं 10 नियम और कानून

1. सूर्य निकलने और अस्त होने के बीच ही तिरंगा फहराया जा सकता है।

2. झंडे को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जा सकता है। झंडे को आधा झुकाकर नहीं फहराया जाता है, सिर्फ तब जब सरकारी इमारतों पर झंडे को आधा झुकाकर फहराने के आदेश जारी किए गए हों।

3. झंडा हाथ से काते और बुने गए ऊनी, सूती, सिल्क या खादी से बना होना चाहिए।

4. झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए। इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए।

5. केसरिया रंग को नीचे की तरफ करके झंडा लगाया या फहराया नहीं जा सकता।

6. झंडे के किसी भाग को जलाने, नुकसान पहुंचाने के अलावा मौखिक या शाब्दिक तौर पर इसका अपमान करने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

7. झंडे को कभी पानी में नहीं डुबोया जा सकता। किसी भी तरह फिजिकल डैमेज नहीं पहुंचा सकते।

8. तिरंगे की यूनिफॉर्म बनाकर पहनना गलत है। तिरंगे को अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन आदि बनाकर भी इस्तेमाल नहीं होता है।

9. किसी कार्यक्रम में वक्ता की मेज को ढकने या मंच को सजाने में झंडे का इस्तेमाल नहीं होता है।

10. फटा या मैला-कुचैला झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए। झंडा फट जाए, मैला हो जाए तो उसे एकांत में मर्यादित तरीके से पूरी तरह नष्ट कर दिया जाना चाहिए।

कहते हैं कि झंडे को हमेशा जलसे में दीवार के पीछे ऊपर की तरफ सम्मान के साथ लगाना चाहिए या फिर वक्ता के दाहिनी तरफ हमेशा तिरंगा होना चाहिए।

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