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ISRO का सबसे लंबा मिशन, 8 उपग्रहों के साथ PSLV उड़ा

भारत केे द्वारा इसरो के श्रीहरिकोटा केंद्र से आठ उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के लिए छोड़ा गया।

ISRO का सबसे लंबा मिशन, 8 उपग्रहों के साथ PSLV उड़ा
चेन्नई. भारत सौ विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण का जादुई आंकड़ा छूने वाला देश बन गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। भारत ने इसरो के श्रीहरिकोटा केंद्र से उस रॉकेट को लॉन्च किया है जो आठ उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करेगा। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अनुसार, इसरो की व्यावसायिक शाखा ने अब तक 20 देशों के 74 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।
8 सैटेलाइट्स को दो अलग-अलग ऑर्बिट में लेकर जाएगा यह रॉकेट
यह रॉकेट 8 सैटेलाइट्स को दो अलग-अलग ऑर्बिट में लेकर जाएगा। इनमें भारत के तीन और अमेरिका-कनाडा और अल्जीरिया के 5 सैटेलाइट्स शामिल हैं। सैटेलाइट्स को ऑर्बिट तक पहुंचाने में 2.15 घंटे से ज्यादा वक्त लगेगा। इस मिशन की उलटी गिनती शनिवार को शुरू हो गई थी। इसे 9 बजकर 12 मिनट पर लॉन्च किया गया है।
आज सुबह भारतीय रॉकेट, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) पांच विदेशी उपग्रहों को छोड़ा गया। प्रक्षेपण सफल होने के साथ ही विदेशी उपग्रहों की कुल संख्या 79 हो गई है। अगले महीने भारत दो और विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा।
IIT मुंबई का 'प्रथम' और बेंगलुरु यूनिवर्सिटी का 'पिसाट' सैटेलाइट्स
PSLV-C35 रॉकेट अपने साथ IIT मुंबई का 'प्रथम' और बेंगलुरु यूनिवर्सिटी का 'पिसाट' सैटेलाइट्स लेकर गया। 'प्रथम' का वजन 10 किग्रा और बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का बनाया 'पिसाट' 5.25 किग्रा का है। 'पिसाट' को पीईएस यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु ने एसकेआर इंजीनियर कॉलेज, सोना कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, सेलम, वेलटेक यूनिवर्सिटी, चेन्नई और नेहरू और कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने बनाया है। यह सैटेलाइट पृथ्वी की स्टडी में मदद करेगा।

सैटेलाइट्स को अलग-अलग ऑर्बिट पर पहुंचाएगा
यह रॉकेट अपने साथ ले गए सैटेलाइट्स को अलग-अलग ऑर्बिट पर पहुंचाएगा। PSLV-C35 की लॉन्चिंग के बाद 16 मिनट 56 सेकंड में ही 730 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल कर लेगा। 4th स्टेज का इंजन बंद हो जायेगा। 17 मिनट 33 सेकंड में सैटेलाइट स्कैटसैट-1 रॉकेट से अलग हो जायेगा।मिशन के एक घंटे 22 मिनट 58 सेकंड में 4th स्टेज का इंजन दोबारा शुरू किया जायेगा। दो घंटे 11 मिनट 46 सेकंड में PSLV नीचे 689.73 किलोमीटर की ऊंचाई पर आ जाएगा। यहां से 4th स्टेज का इंजन बंद कर डुअल लांच एडेप्टर को PSLV से अलग कर दिया जायेगा। एक-एक कर दूसरे सात सैटेलाइट्स उनकी तय ऑर्बिट में छोड़ा जाएगा।
मिशन का मूल मक़सद
इस मिशन का मूल मक़सद एससीएटीएसएटी-1 को अंतरिक्ष में स्थापित करना है। यह उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा से मौसम की भविष्यवाणी में मदद करेगा। इस प्रक्षेपण के दौरान पांच विदेशी उपग्रहों को भी अंतरिक्ष की कक्षा में छोड़ा गया, जिनमें अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया के उपग्रह शामिल हैं।
इसरो के अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "कुछ प्रक्षेपणों के बाद हमें उम्मीद है कि सौ विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण के जादुई आंकड़े को छू लेंगे।"
हर साल क़रीब 12 लॉन्च की योजना
हालांकि इस तरह के पिग्गीबैंक उपग्रहों का आकार छोटा होता है। इसरो साल 2007 से उपग्रहों के प्रक्षेपण का ठेका पा रहा है, जब इसने एगील इतावली उपग्रह को प्रक्षेपित किया था। भारत अब हर साल क़रीब 12 लॉन्च की योजना बना रहा है। यह साल 2015 के मुक़ाबले दोगुनी संख्या होगी। इसके अलावा वैज्ञानिकों को अब दूसरे देश की स्पेस एजेंसियों से ही नहीं, बल्कि स्पेस एक्स जैसी निज़ी कंपनियों से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की शुरुआत साल 1999 में
भारत ने विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की शुरुआत साल 1999 में की थी। और इसी साल जून में इसरो ने पीएसएलवी के ज़रिए एक साथ 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाया था। जून में जो उपग्रह अतंरिक्ष में भेजे गए, उनमें भारत के तीन और 17 विदेशी उपग्रह थे। उस बेहद क़ामयाब लॉंच के बाद, आज पीएसएलवी का पहला लॉन्च है। इसके साथ ही अंतरिक्ष अभियान से भारत को होने वाली कमाई भी 12 करोड़ डॉलर को पार कर जाएगी।
भारत ने अभी तक लगातार 35 सफल लॉम्च पूरे किए
भारत अभी तक केवल छोटे और हल्के विदेशी सैटेलाइट ही लॉंच कर रहा है। पीएसएलवी की मदद से भारत ने अभी तक लगातार 35 सफल लॉम्च पूरे किए हैं। अगर भारत ज़्यादा बड़े उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सफल हो जाता है, तो इससे सैटेलाइट लॉंचिंग के बाज़ार में भारत की स्थिति और मज़बूत हो सकती है और भारत इससे अरबों डॉलर की कमाई कर सकता है।
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