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भारत-इजरायल की दोस्ती से घबराया पाक और चीन, रूस भी दुविधा में

भारत और इजरायल पिछले 25 वर्षों से एक अच्छे सहयोगी के रूप में मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन जब से केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तब से भारत के इजरायल से रिश्ते और प्रगाढ़ हुए हैं और नव वर्ष की शुरूआत में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की छह दिवसीय भारत यात्रा का कूटनीतिक के साथ-साथ सामरिक महत्व भी है।

भारत-इजरायल की दोस्ती से घबराया पाक और चीन, रूस भी दुविधा में

भारत और इजरायल पिछले 25 वर्षों से एक अच्छे सहयोगी के रूप में मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन जब से केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तब से भारत के इजरायल से रिश्ते और प्रगाढ़ हुए हैं। इस वक्त दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध सुखद ऊंचाइयों पर है। नव वर्ष की शुरूआत में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की छह दिवसीय भारत यात्रा का कूटनीतिक के साथ-साथ सामरिक महत्व भी है।

भारत जिस तेजी से वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, उसमें आगे बढ़ने और टिके रहने के लिए मजबूत सहयोगी की जरूरत है। भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे कठिन पड़ोसियों से घिरा हुआ है। पाकिस्तान आतंकवाद के सहारे भारत को अस्थिर बनाए रखना चाहता है तो चीन वैश्विक महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा के चलते भारत को सामरिक रूप से घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है।

अब तक भारत का मित्र रहा रूस भी इस वक्त कूटनीतिक दुविधा की स्थिति में है। वह खड़ा भारत के साथ दिखना चाहता है, लेकिन अपनी अमेरिकी विरोध की नीति के चलते वह चीन के शक्ति केंद्र के साथ का मोह भी नहीं छोड़ पा रहा है। इस वक्त रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन-पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के साथ अधिक स्पष्टता से दिख रहा है।

ऐसे में चीन को रोकने के लिए भारत अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ इजरायल को अपना बेहतर सहयोगी के रूप में देख रहा है। शक्तिशाली देशों में फ्रांस, जर्मनी व ब्रिटेन के साथ भी भारत के मधुर रिश्ते हैं।इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की इस यात्रा का वैश्विक संदेश सपष्ट है कि भारत और इजरायल दोस्त हैं। 15 साल बाद कोई इजरायली पीएम भारत दौरे पर हैं।

इससे पहले 2003 में पीएम एरियल शेरॉन भारत आए थे। नेतन्याहू का यह दौरा भारत-इजरायल की दोस्ती के लिहाज से इसलिए अहम है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने यरूशलम को राजधानी घोषित करने के खिलाफ वोट किया था। इसके अलावा कुछ दिन पहले ही भारत ने इजरायल के साथ 3181 करोड़ रुपये की एंटी टैंक स्पाइक मिसाइल डील और रॉफेल वेपंस डील निरस्त कर दी थी।

इसके बावजूद नेतन्याहू का भारत आना इजरायल की कूटनीतिक परिपक्वता को दिखाता है। इजरायल एशिया में भारत को मजबूत सहयोगी के रूप में देख रहा है। वह किसी भी सूरत में तात्कालिक फायदे के लिए भारत से अपनी दोस्ती को खराब नहीं करना चाहता है। चारों तरफ दुश्मनों से घिरा एक छोटे देश होने के बावजूद जिस मजबूती से इजरायल ने खुद को महफूज रखा है और अपनी शक्ति हासिल की है, वह भारत जैसे देशों के लिए अनुकरणीय है।

सीमा सुरक्षा के मामले में भारत इजरायल से बहुत कुछ सीख सकता है और उसकी मदद ले सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व में इजरायल के सहयोग के महत्व को समझते हैं, इसलिए उन्होंने इजरायल की यात्रा की और वहां जाने वाले पहले भारतीय पीएम बने। इजरायल कृषि, विज्ञान और रक्षा क्षेत्र में भारत का सहयोगी है। भारत हर साल इजरायल से 6400 करोड़ रुपये का हथियार लेता है।

दोनों देशों के बीच हर साल करीब 25,452 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। 1999 में करगिल युद्ध के समय केवल एक बार कहने पर इजरायल ने भारत को लेजर गाइडेड बम और मानवरहित प्लेन मुहैया कराया था। बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी दिया था। अभी नेतन्याहू के साथ 130 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल भी इस दौरे पर आया है।

इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सिक्योरिटी, मेडिसिन, सिनेमा, जल, रक्षा, फूड इंडस्ट्री, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, व्यापार आदि क्षेत्रों में नए समझौते हो सकते हैं। दोनों देशों में 445 करोड़ रुपये के जमीन से हवा में मार करने वाली 131 मिसाइलों की डील होगी। 3181 करोड़ की एंटी टैंक मिसाइल डील हो भी सकती है, जिसे अभी भारत ने रद कर दिया था।

इसके तहत इजरायल, भारत को 8,000 एंटी टैंक स्पाइक मिसाइल देगा। इजरायल भारत को पाक सीमा पर चौकसी के लिए स्मार्ट बाड़ भी देगा। पठानकोट हमले के बाद भारत ने पाक सीमा पर स्मार्ट बाड़ लगाने का फैसला किया था। स्मार्ट बाड़ इजरायल ने अरब देशों के साथ लगती अपनी 200 किमी की सीमा पर लगा रखी है। वह हवा में खतरे की वॉर्निंग एंड कंट्रोल करने वाला सिस्टम अवाक्स भी दे रहा है।

प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर नेतन्याहू का स्वागत कर और तीन मूर्ति चौक का नाम तीन मूर्ति हाइफा चौक बदलकर भारत ने दिखाया है कि वह इजरायल के साथ अपनी दोस्ती को कितना महत्व देता है। आतंकवाद के खात्मे में भी तेलअवीव नई दिल्ली को मदद कर सकता है।

मोदी व नेतन्याहू के बीच फिलीस्तीन, येरूशलम, मिडिल-ईस्ट विवाद जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है। इतना साफ है दोनों देश मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। इजरायल के साथ भारत विश्व में नया शक्ति संतुलन भी बना रहा है।

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