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अब मजबूत मैक्रो-इकॉनमी से रुपये को मिलेगी सुरक्षा

ग्रीस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन और प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी दोनों की इकनॉमिक पॉलिसी की पहली परीक्षा है।

अब मजबूत मैक्रो-इकॉनमी से रुपये को मिलेगी सुरक्षा

मुंबई.भूमध्यसागरीय देश ग्रीस से उठने वाला तूफान भारतीय वित्तीय बाजार में तबाही मचा सकता है, 2013 के मुकाबिल अभी के बेहतर मैक्रो-इकॉनॉमिक फंडामेंटल्स के चलते नुकसान कम हो सकता है। ज्ञात हो कि साल 2013 में अमेरिका में राहत पैकेज को धीरे धीरे वापस लाने के लिए जाने की आहट डॉलर के मुकाबले भारतीय रूपया धराशायी हो गया था।

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वित्तीय बाजार, मुद्रा के इर्द- गिर्द घूमता है। भारतीय मुद्रा रूपया इमर्जिंग मार्केट में बेस्ट परफॉर्मर रहा है। ऐसे में इस रूख से पता चलता है कि इसमें निवेशक का कितना भरोसा है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के ग्लोबल मार्केट्स रीजनल हेड मैनेजिंग डायरेक्टर अनंत नारायण बताते हैं कि, 'जोखिम आमतौर पर डेट के साथ होता है, इक्विटी के साथ नहीं। मार्केट से ज्यादा आउटफ्लो नहीं होगा क्योंकि स्टेबल करंसी से किसी को 8 पर्सेंट रिटर्न नहीं मिलता।'
सीएलएसए के क्रिस वुड जैसी शख्सियत के अलावा बहुत से इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया पर ओवरवेट हैं। अगर वे इक्विटी सेल करते भी हैं तो फंड्स इंडिया से बाहर नहीं जाएगा। वह पैसा बाद में इंडिया में ही लगेगा।
सोमवार को डॉलर के मुकाबले 0.3 पर्सेंट गिरकर 63.85 पर बंद हुआ रुपया इस साल 1.2 पर्सेंट कमजोर हुआ है। इसके मुकाबले साउथ कोरिया का वोन सोमवार को 0.7 पर्सेंट और इस साल अब तक 3 पर्सेंट कमजोर हुआ है। साउथ अफ्रीका का रैंड तो इस साल अब तक 5.8 पर्सेंट टूट चुका है।
ग्रीस रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन और प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी दोनों की इकनॉमिक पॉलिसी की पहली परीक्षा है। रुपये में आनेवाली वोलैटिलिटी से पता चलेगा कि दोनों ने बचाव के कितने मजबूत कदम उठाए हैं।
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