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चीन की विकास दर तक पहुंचेगा भारत, नई सरकार पर विश्व बैंक का आंकलन

विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2016 और 2017 के लिए विकास दर सात-सात प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान जताया है।

चीन की विकास दर तक पहुंचेगा भारत, नई सरकार पर विश्व बैंक का आंकलन
वाशिंगटन. पिछले साल मई में भारत में सत्ता में आई नई सरकार द्वारा आर्थिक सुधारों के लिए उठाए गए कदमों को लेकर उत्साहित विश्व बैंक का कहना है कि भारत 2016-17 में चीन की विकास दर के समान विकास दर हासिल कर लेगा। विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कौशिक बसु ने बताया, हमारे आकलन के अनुसार, भारत वर्ष 2016 और 2017 में चीन के विकास के समकक्ष पहुंच जाएगा।
बसु बैंक द्वारा (ग्लोबल आउटलुक) डिसअपॉइन्टमेंट्स, डाइवर्जेंसेज एंड एक्सपेक्टेशन्स ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट का हालिया अंक जारी किए जाने के बाद कल एक बैठक के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा, चीन की विकास दर ऊंची बनी रहेगी लेकिन वह धीरे-धीरे घटने लगेगी और वर्ष 2017 में 6.9 पर पहुंच जाएगी। विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2016 और 2017 के लिए विकास दर सात-सात प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान जताया है। वहीं इस रिपोर्ट में चीन की विकास दर इन वर्षों में क्रमश: सात और 6.9 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान जताया गया है।
पहली बार भारत होगा सफल
पिछले कुछ समय में यह पहली बार होगा, जब भारत की विकास दर एशियाई दिग्गज चीन की अर्थव्यवस्था के समकक्ष पहुंच जाएगी। विश्व बैंक ने वर्ष 2014 के लिए विकास दर के 5.6 रहने का अनुमान जताया था और वर्ष 2015 में उसने विकास दर 6.4 रहने का पूर्वानुमान जताया है। जबकि उसने वर्ष 2014 में चीन की विकास दर 7.4 :अनुमानित: और वर्ष 2015 में उसकी 7.1 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान जताया। अपनी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा है कि दक्षिण एशिया में विकास दर वर्ष 2014 में बढ़कर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई जबकि वर्ष 2013 में यह 4.9 पर थी। वर्ष 2013 की यह विकास दर दस वर्षों में सबसे निचले स्तर पर थी। रिपोर्ट में कहा गया, इस उछाल का कारण इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी भारत बना, जो कि दो साल की धीमी विकास दर के बाद उभरकर आया। इसमें आगे कहा गया है कि भारत में सुधारों के चलते आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें कम हुईं, पाकिस्तान में राजनैतिक तनाव घटा, बांग्लादेश और नेपाल में धन प्राप्ति अच्छी रही और क्षेत्र के निर्यात की मांग मजबूत रही जिसके चलते वर्ष 2017 तक क्षेत्रीय विकास दर के बढ़कर 6.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।
बाजार में जोखिम कम हुआ
रिपोर्ट में कहा गया, पिछले समय में किए गए समायोजनों ने वित्तीय बाजार की अस्थिरता के कारण पैदा होने वाली असुरक्षा को कम किया है। जोखिम मुख्यत: घरेलू और राजनीतिक प्रकृति के हैं। विकास की हालिया गति को बनाए रखने के लिए सुधारों की गति और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखना जरूरी है। बैंक के अनुसार, भारत में सुधारों और विनियमन के क्रियान्वयन से एफडीआई में वृद्धि होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा, निवेश (जो कि जीडीपी का लगभग 30 प्रतिशत है) के जरिए वर्ष 2016 तक विकास दर में मजबूती और वृद्धि आनी चाहिए और यह सात प्रतिशत तक पहुंचनी चाहिए। हालांकि यह सुधारों की मजबूत और सतत प्रगति पर निर्भर करता है। सुधार की गति जरा सी भी धीमी होने का नतीजा मंदी से उबरने की रफ्तार को पहले से कहीं अधिक अवरूद्ध कर सकता है।
नीचे की स्लाइड्स में देखिए, अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही -
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