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समुद्री कारोबार में चीन से आगे भारत!

घाटे के दौर से गुजर रहे हैं दुनियाभर के बंदरगाह

समुद्री कारोबार में चीन से आगे भारत!
नई दिल्ली. देश के समुद्री कारोबार की सेहत सुधारने की दिशा में बंदरगाहों के अत्याधुनिक विकास की परियोजनाओं का नतीजा सामने आने लगा है। मसलन जहां दुनियाभर के बंदरगाह घाटे के दौर से गुजर रहे है, वहीं भारत के बंदरगाहों से भारत को छह हजार करोड़ का मुनाफा हुआ है। भारत ने चीन जैसे देश को भी बंदरगाह के विकास और कारोबार में पीछे छोड़ दिया है।
केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय भारत के बंदरगाहों को मुनाफे में आने की उपलब्धि के मद्देनजर देश में बंदरगाहों के विस्तार की योजना बना रहा है। मसलन देश में प्रमुख 12 बंदरगाहों के अत्याधुनिक विकास और उनकी समुद्री कारोबार क्षमता बढ़ाने के साथ ही छह और बंदरगाह बनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा दौर में जहां दुनियाभर के बंदरगाह घाटे के दौर से गुजर रहे हैं, वहीं भारत के बंदरगाहों ने छह हजार करोड़क का मुनाफा कमाते हुए इस क्षेत्र में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो केंद्र सरकार की परियोजनाओं का नतीजा माना जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, सागरमाल कार्यक्रम के जरिए बंदरगाहों के विकास और उसके कारोबार में भारत ने सकल घरेलू उत्पाद के मामले में चीन को भी पीछे धकेल दिया है। इस मामले में इस क्षेत्र में भारत का जीडीपी 19 प्रतिशत है, तो चीन 12.5 प्रतिशत जीडीपी दर पर सिमट गया।
वरदान बनी सागरमाला
मंत्रालय के अनुसार, सागरमाल कार्यक्रम के तहत तटीय मार्ग के माध्यम से कोयले की आवाजाही 2025 तक 129 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य है, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष 2016 में 27 लाख टन प्रतिवर्ष से बढ़कर और मोडल मिर्शण में अंतदेर्शीय जलमार्ग और तटीय शिपिंग की हिस्सेदारी बढ़ाने के 6 से 12 प्रतिशत तक बढने का अनुमान है। मंत्रालय इस कार्यक्रम के तहत हुए एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि तटीय शिपिंग और अंतदेर्शीय जलमार्ग सड़क और रेल परिवहन की तुलना में करीब 70 प्रतिशत सस्ता है। जलमार्ग का उपयोग कच्चे माल और तैयार उत्पादों हिल के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता निहित है। इस दिशा में तटीय शिपिंग के जरिए इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, पीओएल और खाद्यान्न के रूप में अन्य वस्तुओं की भी ढुलाई की जा रही है, जिसकी क्षमता वर्ष 2025 तक अतिरिक्त 80-85 बारे करोड़ टन की सीमा तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
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