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INDEPENDENCE DAY: दंगों के बाद 8 जुलाई 1947 को महासभा ने की भगवे को राष्ट्रध्वज बनाने की मांग

बंगाल के विभाजन के बाद अब पंजाब के विभाजन की मांग की जाने लगी थी।

INDEPENDENCE DAY: दंगों के बाद 8 जुलाई 1947 को महासभा ने की भगवे को राष्ट्रध्वज बनाने की मांग
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरिज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि हमारे लिए 8 जुलाई 1947 का दिन किस रूप में महत्वपूर्ण रहा था। इस सीरिज में अब तक आपने पढ़ा कि 7 जुलाई को कैसे बंगाल में दंगे भड़क उठे थे इसका सबसे ज्यादा असर कलकत्ता पर पड़ा था। इन दंगों में 41 लोगों की मौत हुई थी 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये दंगे, मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग को लेकर भड़के थे। जिसमें पुलिस और दंगाइयों ने जमकर गोलियां चलाई थीं। तो दूसरी तरफ पेशावार में खुदाई खिदमतगार और जुल्म-ए-पख्तून ने भी पठानिस्तान की मांग करने लगे थे। इसके लिए इंडिया मजहबी सिख फेडरेशन के अध्यक्ष हरि सिंह ने मुस्लिम लीग को यह आश्वासन दिया था कि दस लाख मजहबी सिख पाकिस्तान का समर्थन करेंगे।
8 जुलाई 1947 के दिन के बारे में हम भारतीयों के लिए जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि आज ही के दिन (8 जुलाई) बंगाल के विभाजन के बाद अब पंजाब विभाजन की तैयारियां शुरू होने लगी थीं। जिसके विरोध में पूरे पंजाब प्रांत 50 लाख से ज्यादा सिखों ने सर पर काला कपड़ा बांधकर गुरूद्वारों में दुआ मांगी और आम सभाएं करके विभाजन का विरोध किया। पेशावर में रायसुमारी के दूसरे चरण को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया और लखनऊ में हिंदू महासभा ने मांग की भारत के राष्ट्र झंडे का रंग भगवा हो।
इनका मानना था कि वे (सिक्ख) किसी भी ऐसे प्रस्ताव को नहीं मानेंगे जिसके कारण उनके आपसी भाई चारे और अखंडता पर प्रभाव पड़े। पंजाब के गवनर जेनकिंस ने माउंटबेटन को पत्र लिखा कि यहां विरोध दिवस शांतिपूर्वक गुजर गया अमृतसर में आयोजित हुई सभाओं को हिंदुओं और सिक्खों दोनों ने संबोधित किया। सिक्खों की हड़ताल का असर दिल्ली में भी हुआ और पंजाब में भी लगभग सारी दुकानें बंद रहीं।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान के बाद किसकी मांग की थी -
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