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INDEPENDENCE DAY: 7 जुलाई 1947 को बंगाल में भड़के थे दंगे, 41 की मौत-सैकड़ों घायल

इस दंगे में 41 लोगों की जान गई और 41 लोग घायल हुए।

INDEPENDENCE DAY: 7 जुलाई 1947 को बंगाल में भड़के थे दंगे, 41 की मौत-सैकड़ों घायल
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नई दिल्ली.INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरिज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि हम भारतीयों के लिए 7 जुलाई 1947 का दिन किस रूप में महत्वपूर्ण रहा था। इस सीरिज में अब तक आपने पढ़ा कि 6 जुलाई को कैसे देश में सिलहट के लिए मतदान हुए, ताकि इस बात का फैसल हो सके कि सिलहट असम में है या पूर्वी पाकिस्तान में। दूसरी ओर फ्रंटियर के हजारा और डेरा इस्माइल खान में मतदान के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया था क्योंकि खान अब्दुल गफ्फार खान के संगठन ‘लाल कुर्ती’ ने पठानिस्तान दिवस मनाने का ऐलान कर दिया था।
7 जुलाई 1947 के दिन को हम सभी भारतीयों के लिए जानना जरूरी है क्योंकि आज ही (7 जुलाई) के दिन बंगाल में दंगे भड़क उठे थे और इसका सबसे ज्यादा असर कलकत्ता (अब कोलकाता) में देखने को मिला। कलकत्ता में पुलिस और दंगाइयों ने एक-दूसरे पर गोलियां चलाई। इस दंगे में 41 लोगों की जान गई और 41 लोग घायल हुए। दंगों की शुरूआत चौरंगी में बेंट्रिट स्ट्रीट से हुई। दंगे मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग को लेकर शुरू हुए थे। यह दंगे आजादी मिलने के बाद भी जारी रहे और बंगाल के कई हिस्सों से मुस्लिमों को यह जगह छोड़कर जाने के लिए मजबूर किया गया। कई इतिहासकार तो इन्हें दंगा नहीं बल्कि एक समुदाय की ही कार्रवाई मानते हैं।
बंटवारे की आशंका और आजादी की संभावना के बीच बंगाल में दंगों की खबर देश पर गाज की तरह गिरी। बंगाल अपने अकाल की बुरी यादों से अभी उबर नहीं सका था कि वहां पर दंगे शुरू हो गए।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, ऑल इंडिया मजहबी सिख फेडरेशन के अध्यक्ष ने मुस्लिम लीग को क्या आश्वासन दिया -
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